उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से ऊर्जा बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव प्रस्तावित किया गया है, जिसमें बड़ी कंपनियों, स्टार्टअप्स और अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार का मानना है कि इस कदम से दफ्तरों में भीड़ कम होगी, ट्रैफिक दबाव घटेगा और बिजली व ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही बैठकों को वर्चुअल मोड में शिफ्ट करने, कार पूलिंग को बढ़ावा देने और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने जैसे उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे शहरों में संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
इस नीति के पीछे सरकार की सोच यह है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और ऊर्जा खपत के बीच एक ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिसमें विकास की गति प्रभावित न हो और संसाधनों पर दबाव भी कम हो। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है तो ऑफिस आधारित कामकाज के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और कॉरपोरेट सेक्टर में हाइब्रिड वर्क मॉडल और मजबूत हो सकता है।
इसी बीच केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर बड़ा फैसला लेते हुए इंपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे कीमती धातुओं की कीमतों में उछाल की आशंका बढ़ गई है। नए बदलाव के अनुसार अब सोना-चांदी पर कुल कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी गई है, जिसमें बेसिक कस्टम ड्यूटी और सेस दोनों शामिल हैं। इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार से आने वाले गोल्ड और सिल्वर की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे घरेलू बाजार में भी दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने से ज्वेलरी इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ सकता है और शादी-विवाह जैसे सीजन में आम उपभोक्ता को अधिक खर्च करना पड़ सकता है। हालांकि सरकार का तर्क यह है कि इस कदम से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे देश की विदेशी मुद्रा बचत में मदद मिलेगी।
इसी तरह ईंधन बचत और सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी एक नई पहल की है, जिसमें काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने, वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित करने और सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने की अपील शामिल है। यह कदम प्रधानमंत्री की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बाद सामने आया है, जिसका उद्देश्य ईंधन की खपत को कम करना और पर्यावरण पर दबाव घटाना बताया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि अगर इस तरह की पहलें जमीनी स्तर पर सफल होती हैं, तो यह न केवल ईंधन की बचत में मदद करेंगी बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण जैसी समस्याओं को भी काफी हद तक कम कर सकती हैं। साथ ही प्रशासनिक स्तर पर कामकाज की दक्षता बढ़ाने और अनावश्यक यात्रा खर्च घटाने में भी यह मॉडल उपयोगी साबित हो सकता है।
इन सभी फैसलों और प्रस्तावों को मिलाकर देखा जाए तो यह साफ है कि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर अब नीतियों का फोकस संसाधन बचत, डिजिटल वर्किंग मॉडल और लागत नियंत्रण की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में इन फैसलों का असर न केवल सरकारी कामकाज पर बल्कि आम जनता की जीवनशैली और खर्चों पर भी सीधे तौर पर देखने को मिल सकता है।
written by :- Anjali Mishra
https://www.youtube.com/watch?v=KbtY7jU7Fu0
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