प्रयागराज में माघ मेले का आज सबसे बड़ा और अहम स्नान पर्व मौनी अमावस्या के रूप में सामने आया है, जहां आस्था ने हर सीमा तोड़ दी है। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही त्रिवेणी संगम और आसपास के सभी घाटों पर श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा मेला क्षेत्र मानो भक्तिमय समुद्र में बदल गया। ठंड, कोहरा और अंधेरा कुछ भी लोगों की आस्था के आगे बाधा नहीं बन सका।
सुबह होते-होते संगम तट “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगा” के जयघोष से गूंज उठा। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाकर खुद को धन्य महसूस करते दिखे। अब तक लाखों लोग स्नान कर चुके हैं, जबकि माघ मेले के पहले ही दिन करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई थी, जिसने प्रशासन को भी हैरान कर दिया।
प्रशासन का अनुमान है कि आज और कल मिलाकर तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु प्रयागराज पहुंच सकते हैं। इसी को देखते हुए व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साढ़े तीन किलोमीटर लंबा विशेष स्नान घाट तैयार किया गया है, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सभी को सुरक्षित स्नान का अवसर मिले।
सुरक्षा को लेकर भी कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। NDRF, SDRF, PAC, गोताखोरों और ATS कमांडो की तैनाती की गई है, जो हर पल स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। नदी के भीतर से लेकर घाटों और मेला क्षेत्र तक हर जगह सुरक्षा बल मुस्तैद हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। पूरे मेला क्षेत्र में CCTV कैमरों और ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, जिससे भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा प्रभावी हो सके। खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हैं और हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल सुविधाएं, पीने का पानी, अलाव, शौचालय और मार्गदर्शन केंद्र भी बड़ी संख्या में बनाए गए हैं। ठंड के बावजूद बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे पूरी श्रद्धा के साथ संगम की ओर बढ़ते दिखे। प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वजह से श्रद्धालुओं में संतोष और भरोसा साफ नजर आया।
मौनी अमावस्या का यह स्नान सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का विराट संगम है। यहां साधु-संतों की तपस्या, कल्पवासियों का संयम और आम श्रद्धालुओं की श्रद्धा सब एक साथ दिखाई देते हैं, जो माघ मेले को दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन बनाते हैं।
जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, वैसे-वैसे संगम की ओर आने वाली भीड़ और बढ़ती जा रही है। प्रयागराज आज सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है। यह महास्नान एक बार फिर साबित कर रहा है कि भारतीय संस्कृति में श्रद्धा की शक्ति कितनी विशाल और अटूट है।
written by :- Anjali Mishra
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