लखनऊ के विधान भवन में 18 से 23 जनवरी तक एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है, जिसके चलते शहर की प्रशासनिक और यातायात व्यवस्था पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इस दौरान 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन और 62वां सचिवों का सम्मेलन होगा, जिसमें देशभर से कई प्रमुख प्रतिनिधि और अधिकारी शामिल होंगे। ऐसे में सुरक्षा और सुचारु संचालन को देखते हुए यातायात में बड़े बदलाव किए गए हैं।
सम्मेलन के मुख्य कार्यक्रम 19 से 21 जनवरी के बीच होंगे, और इन्हीं तीन दिनों में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक विशेष ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि इस दौरान आम लोगों को कुछ इलाकों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी, ताकि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके और वीआईपी मूवमेंट सुरक्षित रहे।
सबसे अहम बदलाव यह है कि GPO, विधानसभा मार्ग और रॉयल होटल रोड को पूरी तरह नो-व्हीकल जोन घोषित किया गया है। इन सड़कों पर किसी भी प्रकार के निजी या सार्वजनिक वाहन की आवाजाही नहीं होगी। इसका असर शहर के मध्य हिस्से में रोज़ाना आने-जाने वाले लोगों पर पड़ेगा, इसलिए पहले से योजना बनाना बेहद जरूरी है।
रोडवेज और सिटी बसों के संचालन को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बसों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं, ताकि सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप न हो। प्रशासन ने निर्देश दिया है कि बसें अब सिकंदरबाग, बंदरियाबाग और 1090 चौराहा-कैंट मार्ग से होकर संचालित की जाएंगी।
इस बदलाव का मतलब यह है कि रोज़मर्रा के यात्रियों को अपने सफर में थोड़ा अतिरिक्त समय लग सकता है। ऑफिस जाने वाले, छात्र और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे समय से पहले घर से निकलें और बदले हुए रूट की जानकारी पहले ही हासिल कर लें, ताकि किसी तरह की असुविधा न हो।
ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन ने शहर के प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है। जगह-जगह बैरिकेडिंग की जाएगी और डिजिटल साइन बोर्ड के जरिए लोगों को वैकल्पिक मार्गों की जानकारी दी जाएगी। कंट्रोल रूम से पूरे ट्रैफिक सिस्टम की निगरानी की जाएगी ताकि जाम की स्थिति न बने।
प्रशासन का कहना है कि यह सम्मेलन लखनऊ और उत्तर प्रदेश के लिए सम्मान का विषय है, इसलिए सुरक्षा और व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी जा सकती। इसी वजह से कुछ कड़े कदम उठाए गए हैं, जिनका मकसद सिर्फ यह है कि शहर की सामान्य गतिविधियां न्यूनतम परेशानी के साथ चलती रहें।
आम जनता से अपील की गई है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें, अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। निजी वाहन के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने से भीड़ और जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
कुल मिलाकर, 18 से 23 जनवरी के बीच लखनऊ की सड़कों पर रफ्तार बदली हुई नजर आएगी। अगर आप पहले से तैयारी और सही मार्ग का चुनाव करेंगे, तो यह ट्रैफिक डायवर्जन आपके लिए परेशानी नहीं, बल्कि एक मैनेज्ड सिस्टम का हिस्सा बन जाएगा।
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