शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद में अब किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी भी खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने इस मामले में तीखा बयान देते हुए कहा कि सिर्फ वस्त्र पहन लेने या कोई पद हासिल कर लेने से कोई संत नहीं बन जाता। ममता कुलकर्णी ने दावा किया कि आज 10 में से 9 महामंडलेश्वर झूठे हैं और केवल दिखावे के लिए धर्मिक पदों पर बैठे हैं।
उन्होंने शंकराचार्य पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उन्हें आखिरकार किसने नियुक्त किया और भारी भीड़ में पालकी की जिद क्यों की गई। ममता कुलकर्णी का कहना था कि इसी जिद की वजह से उनके शिष्यों की पिटाई हुई और इस घटना ने धर्म और अनुशासन दोनों को कलंकित किया। उनका मानना है कि गुरु का आचरण जिम्मेदारी और शांति से भरा होना चाहिए, न कि अहंकार और जिद से।
इस बयान के बाद विवाद और भी तूल पकड़ गया है। ममता कुलकर्णी ने साफ कहा कि धर्म और आध्यात्मिक नेतृत्व केवल नाम या पद से नहीं बल्कि कर्म और नैतिकता से साबित होता है। उनके अनुसार, समाज में ऐसे झूठे संतों की संख्या बढ़ रही है, जो दिखावे के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान धर्मिक जगत में व्यापक बहस को जन्म देते हैं और लोगों को सोचने पर मजबूर करते हैं कि धर्म और पद की असली पहचान क्या है। ममता कुलकर्णी ने यह भी बताया कि गुरु का व्यवहार हमेशा शांत और न्यायपूर्ण होना चाहिए, न कि किसी तरह की हिंसा या विवाद पैदा करने वाला।
शिष्यों की पिटाई और विवादित घटनाओं ने शंकराचार्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। ममता कुलकर्णी का यह खुलासा इस मामले को मीडिया और सोशल मीडिया में तेजी से ट्रेंड करवा रहा है। लोग उनके बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और धर्मिक अनुशासन के सवाल उठा रहे हैं।
किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ने जोर देकर कहा कि धर्मिक पद और समाजिक सम्मान केवल जिम्मेदारी और सत्संग से आता है, न कि दिखावे और अहंकार से। उनके अनुसार, यह समय है कि झूठे संतों को पहचानकर समाज को सचेत किया जाए।
ममता कुलकर्णी की यह बयानबाजी न केवल शंकराचार्य विवाद में नए मोड़ की ओर इशारा कर रही है, बल्कि धर्मिक नेतृत्व की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल उठा रही है। यह मामला आने वाले समय में और बहस का विषय बनेगा।
धर्मिक विशेषज्ञ और समाजशास्त्री भी इस विवाद को गंभीरता से देख रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में सच्चाई सामने लाना जरूरी है ताकि धर्म और आध्यात्मिक मार्ग सही दिशा में कायम रह सके।
written by :- Anjali Mishra
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