अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज गोरखपुर से अपनी राज्यव्यापी गौरक्षार्थ यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस अभियान को उन्होंने “धर्मयुद्ध” नाम दिया है, जो पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस यात्रा का उद्देश्य सभी विधानसभा क्षेत्रों में जाकर लोगों को गौरक्षा के प्रति जागरूक करना बताया जा रहा है। वे इस दौरान सामाजिक और धार्मिक संदेश के साथ लोगों से जुड़ने की कोशिश करेंगे।
गोरखपुर जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम को अनुमति तो दी है, लेकिन इसके लिए 29 शर्तें भी लागू की गई हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था और शांति बनी रहे।
गोरखपुर से इस यात्रा की शुरुआत को राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव क्षेत्र से शुरू हो रही है। इसे एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
धार्मिक और सामाजिक संदेश के साथ यह यात्रा अब राजनीतिक चर्चा में भी आ गई है, क्योंकि इसके समय और स्थान दोनों को रणनीतिक माना जा रहा है।
शंकराचार्य ने इस दौरान 2027 विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया है और गौरक्षकों से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है, जिससे इसका राजनीतिक आयाम और मजबूत हो गया है।
हालांकि प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यात्रा पूरी तरह नियमों के दायरे में रहेगी और किसी भी तरह की शांति व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी।
स्थानीय स्तर पर इस यात्रा को लेकर लोगों में उत्सुकता भी है और अलग-अलग वर्गों में इसे लेकर चर्चा जारी है।
कुल मिलाकर, यह यात्रा धार्मिक संदेश के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक बहस का भी केंद्र बन गई है, जिस पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।
written by :- Anjali Mishra
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