लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में बनी अवैध मजारों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। पांच मजारों को हटाने के लिए अब दूसरा नोटिस जारी किया गया है, जिससे पूरे मेडिकल परिसर में हलचल तेज हो गई है। यह कार्रवाई संस्थान की जमीन और नियमों से जुड़ी गंभीर चिंताओं के बीच की जा रही है।
प्रशासन के अनुसार इससे पहले 22 जनवरी को कुल छह मजारों को नोटिस भेजा गया था। इनमें से सिर्फ न्यू ऑर्थोपेडिक परिसर की मजार कमेटी ने ही अपना जवाब दाखिल किया, जबकि बाकी पांच मजारों की कमेटियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इसी वजह से अब इन्हें अंतिम मौका देते हुए सख्त चेतावनी दी गई है।
अब प्रशासन ने साफ कर दिया है कि संबंधित पांचों मजार कमेटियों को 28 फरवरी तक कुलसचिव के सामने पेश होना होगा। अगर तय समयसीमा तक कोई ठोस जवाब या दस्तावेज नहीं दिए गए, तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसे प्रशासन का आखिरी और अंतिम अवसर माना जा रहा है।
जांच में सामने आया है कि ये मजारें केजीएमयू के पूर्व कर्मचारियों से जुड़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों को पहले खाली पड़ी जमीन पर दफन किया गया और बाद में धीरे-धीरे वहां मजार का स्वरूप दे दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के खिलाफ है।
जिन स्थानों पर मजारें चिन्हित की गई हैं, उनमें क्वीन मैरी हॉस्पिटल, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, न्यू बॉयज हॉस्टल, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग और शताब्दी फेज-2 अस्पताल परिसर शामिल हैं। ये सभी इलाके केजीएमयू के बेहद संवेदनशील और व्यस्त चिकित्सा क्षेत्र माने जाते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल परिसर में इस तरह की अवैध संरचनाएं न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि मरीजों, डॉक्टरों और छात्रों की आवाजाही और सुरक्षा के लिए भी समस्या पैदा करती हैं। मेडिकल संस्थान में हर इंच जमीन की उपयोगिता स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी होती है।
इस मुद्दे को लेकर केजीएमयू प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने वर्षों तक ये मजारें कैसे बनी रहीं और पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अब जब मामला सामने आया है, तो प्रशासन किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं दिख रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, अगर तय तारीख तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत मजारों को हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस का सहयोग भी लिया जा सकता है।
कुल मिलाकर KGMU परिसर में अवैध मजारों को लेकर शुरू हुई यह कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि प्रशासन की यह सख्ती सिर्फ नोटिस तक सीमित रहती है या फिर जमीन पर भी इसका असर दिखाई देता है।
written by :- Anjali Mishra
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