back to top
Sunday, June 28, 2026
42.9 C
Lucknow
HomeAdministrationलखनऊ में निजी स्कूलों पर डीएम का बड़ा एक्शन! मनमानी फीस और...

लखनऊ में निजी स्कूलों पर डीएम का बड़ा एक्शन! मनमानी फीस और किताब-यूनिफॉर्म के खेल पर चला करोड़ों की शिक्षा व्यवस्था पर सख्त डंडा |

लखनऊ में शिक्षा के नाम पर अभिभावकों के कथित शोषण के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ निजी स्कूलों पर पांच-पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी विशाख जी के निर्देश पर की गई है। आरोप है कि इन स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस वसूली की जा रही थी और अभिभावकों पर स्कूल द्वारा तय की गई दुकानों से ही किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जा रहा था। प्रशासन का कहना है कि शिक्षा के नाम पर इस तरह की मनमानी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

कार्रवाई की जद में आए स्कूलों में एलन पब्लिक स्कूल (वृंदावन), के.के. मॉडर्न पब्लिक स्कूल, सीलवती आइडियल स्कूल, आश्रम एकेडमी (कृष्णा नगर), सेंट डोमिनिक इंटर कॉलेज, सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल (अयोध्या रोड), ब्राइटवे इंटर कॉलेज (राजाजीपुरम) और के.जे. मॉडर्न पब्लिक स्कूल शामिल हैं। इन सभी संस्थानों पर पांच-पांच लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन पाया गया तो और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

पिछले कुछ समय से लगातार अभिभावकों की ओर से शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल बच्चों के प्रवेश और नई कक्षा शुरू होने के समय अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। आरोप था कि स्कूल प्रबंधन केवल फीस ही नहीं बढ़ा रहे, बल्कि अभिभावकों को अपनी पसंद की दुकान से किताबें, कॉपियां, बैग और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए भी बाध्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बढ़ रहा था और उन्हें बाजार में उपलब्ध सस्ते विकल्प चुनने की स्वतंत्रता नहीं मिल रही थी।

इन शिकायतों के आधार पर जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच के दौरान कई स्कूलों में नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों की समीक्षा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी निजी स्कूल को अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने का दबाव बनाने का अधिकार नहीं है। यदि कोई स्कूल ऐसा करता है, तो यह निर्धारित नियमों और शासन के निर्देशों के विपरीत माना जाएगा।

जिलाधिकारी विशाख जी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, व्यवसाय का नहीं। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन का उद्देश्य निजी स्कूलों को बंद करना नहीं, बल्कि उन्हें निर्धारित नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के तहत संचालित करना है ताकि विद्यार्थियों और उनके परिवारों के हित सुरक्षित रह सकें।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद शहर के अन्य निजी स्कूलों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जिन संस्थानों में इसी प्रकार की शिकायतें मिलेंगी, उनके खिलाफ भी जांच और कार्रवाई की जा सकती है। इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों को राहत देने की दिशा में प्रशासन का रुख काफी सख्त नजर आ रहा है।

अभिभावकों के बीच इस कार्रवाई को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लंबे समय से कई परिवार निजी स्कूलों की मनमानी फीस और अनिवार्य खरीदारी की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जता रहे थे। उनका कहना था कि बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ किताबों, कॉपियों और यूनिफॉर्म पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है, जबकि वही सामान बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध होता है। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई उन्हें राहत देने वाली मानी जा रही है।

फिलहाल जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की मनमानी, नियमों का उल्लंघन और अभिभावकों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में भी किसी निजी स्कूल के खिलाफ इसी तरह की शिकायतें मिलती हैं और जांच में वे सही पाई जाती हैं, तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। प्रशासन का संदेश स्पष्ट है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

written by:- Anjali Mishra

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Livenewsx
Livenewsxhttp://www.livenewsx.in
we are digtal news platform.we are covering social facts politics national international news breaking
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments