उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कैबिनेट विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि 4 मई के बाद कभी भी राज्य मंत्रिपरिषद में बड़ा फेरबदल हो सकता है, जिससे सरकार की कार्यशैली और राजनीतिक संतुलन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडे, अशोक कटारिया, पूजा पाल, श्रीकांत शर्मा, राजीव और कृष्णा पासवान शामिल बताए जा रहे हैं।
इन संभावित नामों को लेकर माना जा रहा है कि सरकार संगठनात्मक और जातीय संतुलन साधने की कोशिश कर रही है, ताकि आगामी राजनीतिक चुनौतियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
इसके साथ ही यह भी संकेत मिल रहे हैं कि मौजूदा मंत्रिपरिषद में कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है। कुछ को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जबकि कुछ की भूमिका सीमित भी हो सकती है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि डिप्टी सीएम स्तर पर भी विभागों के पुनर्वितरण की चर्चा चल रही है, जिससे प्रशासनिक कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।
एक अहम बात यह भी सामने आ रही है कि अनुसूचित जाति (एससी) कोटे से जुड़े दो मंत्रियों को पदोन्नति मिलने की संभावना है, जिससे सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश दिखती है।
हालांकि, अभी तक इस पूरे मामले पर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और सभी की नजरें 4 मई के बाद होने वाले संभावित फैसले पर टिकी हैं।
कुल मिलाकर, अगर यह विस्तार होता है तो यह सिर्फ कैबिनेट बदलाव नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीतिक रणनीति में एक बड़ा पुनर्गठन माना जाएगा।
written by :- Anjali Mishra
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