वाराणसी के एक प्ले स्कूल से सामने आए कथित बर्बरता के मामले ने हर किसी को हैरान कर दिया है। आरोप है कि स्कूल में पढ़ने वाले महज 5 साल के एक मासूम बच्चे के साथ शिक्षिका ने बेहद क्रूर व्यवहार किया। बताया जा रहा है कि बच्चे से पैंट में पेशाब हो जाने के बाद शिक्षिका इस कदर नाराज हो गई कि उसने कथित तौर पर गर्म चाकू से बच्चे को दाग दिया और उसके साथ मारपीट भी की। घटना की जानकारी सामने आने के बाद बच्चे के परिवार में आक्रोश फैल गया और मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर स्कूलों में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीरता बरती जा रही है।
बताया जा रहा है कि घटना के बाद जब बच्चे के पिता को पूरे मामले की जानकारी हुई तो वह शिकायत लेकर थाने पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान स्कूल की प्रिंसिपल की ओर से शिकायत वापस लेने के लिए बच्चे के परिवार पर दबाव बनाया गया और धमकी भी दी गई। हालांकि, परिवार ने पीछे हटने के बजाय पुलिस से शिकायत की और पूरे मामले की जांच की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस ने इस मामले में शिक्षिका, स्कूल की प्रिंसिपल और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। अब जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चे के साथ वास्तव में क्या हुआ था। पुलिस की जांच में बच्चे के बयान, परिवार के आरोप, स्कूल से जुड़े लोगों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों की अहम भूमिका होगी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर खड़ा किया है। प्ले स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बेहद कम उम्र के होते हैं और वह अपने साथ होने वाली किसी भी घटना को हमेशा स्पष्ट तरीके से बता पाने की स्थिति में नहीं होते। ऐसे में स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। अगर किसी बच्चे से गलती हो जाती है, तो उसे समझाना और प्यार से सुधारना ही शिक्षा का हिस्सा होना चाहिए, न कि उसके साथ हिंसा या किसी भी तरह की क्रूरता।
मामले में गर्म चाकू से दागने का आरोप बेहद गंभीर है और अगर जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह सिर्फ अनुशासन के नाम पर की गई कार्रवाई नहीं, बल्कि एक मासूम बच्चे के साथ कथित तौर पर गंभीर हिंसा का मामला होगा। बच्चे के शरीर और मानसिक स्थिति पर ऐसी घटना का लंबे समय तक असर पड़ सकता है। इसलिए इस पूरे मामले में पुलिस की जांच और स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
वहीं, स्कूल की प्रिंसिपल पर शिकायत वापस लेने के लिए धमकी देने का आरोप सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है। अब पुलिस इस पहलू की भी जांच करेगी कि क्या परिवार पर वास्तव में शिकायत वापस लेने के लिए किसी तरह का दबाव बनाया गया था। अगर ऐसा पाया जाता है तो इस मामले में आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
इस घटना के सामने आने के बाद अभिभावकों के बीच भी चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि उन्हें सुरक्षित माहौल में शिक्षा और बेहतर संस्कार मिल सकें। लेकिन अगर किसी स्कूल में बच्चे के साथ कथित तौर पर इस तरह की बर्बरता होती है, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा जरूरी हो जाती है।
फिलहाल पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। बच्चे के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि छोटे बच्चों के लिए स्कूलों को कितना सुरक्षित बनाया गया है। अगर एक 5 साल का बच्चा स्कूल में सुरक्षित नहीं है, तो फिर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यही सवाल अब इस पूरे मामले के केंद्र में है।
written by :- Anjali Mishra
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