भारतीय सेना द्वारा हाल ही में किए गए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की अभूतपूर्व सफलता ने न केवल भारत की सैन्य ताक़त को फिर से परिभाषित किया है, बल्कि एक मिसाइल को वैश्विक मंच पर ‘सुपरस्टार’ बना दिया है और उस भारत की मिसाइल का नाम है ब्रह्मोस। भारत-रूस की संयुक्त मेकिंग से बनी यह सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल अब दुनिया के कई देशों की पहली पसंद बन गई है। तेज़ रफ़्तार, सटीक निशाना और विनाशकारी ताक़त के चलते ब्रह्मोस अब भारत की सैन्य डिप्लोमेसी का सबसे असरदार हथियार बन गई है। अब इस मिसाइल की इतनी तारीफ हो रही है जिसके चलते अब इस मिसाइल की डिमांड अंतरराष्ट्रीय लेवल पर भी होने लगी है आपको बता दे की इस मिसाइल को लेकर चर्चा इस हद तक बाद गई है की फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया ने इस मिसाइल को लेकर आधिकारिक बातचीत शुरू कर दी है।
थाईलैंड और ब्रुनेई जैसे देश भी अपने रक्षा बजट में ब्रह्मोस को शामिल करने की तैयारी में हैं। अगर बात करे मध्य-पूर्व तो इजिप्ट, कतर और यूएई {UAE } ने भारत से मिसाइल खरीदने की रुचि दिखाई है। ये देश ब्रह्मोस को अपनी सामरिक रणनीति का हिस्सा बनाना चाहते हैं ।
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दक्षिण अमेरिका ने भी इस मिसाइल को लेकर दस्तक दी है जिसमे अर्जेंटीना, ब्राज़ील और वेनेजुएला जैसे देश भारत से ब्रह्मोस तकनीक पाने को आतुर हैं। यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र है। भारत के लिए इससे ज्यादा गर्व की बात और क्या हो सकती है
यूरोप और अफ्रीका की भी दिलचस्पी दिखाई है बुल्गारिया और दक्षिण अफ्रीका ने भी अपनी सैन्य ज़रूरतों के लिए ब्रह्मोस में लेने की मांग की है। इससे पहले भारत कभी इतने बड़े स्तर पर सैन्य निर्यात की रेस में नहीं था, लेकिन ब्रह्मोस मिसाइल ने यह स्थिति बदल दी है। अब भारत सिर्फ एक रक्षा उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली रक्षा उत्पादक भी बन चुका है। ब्रह्मोस सिर्फ एक मिसाइल नहीं, ये भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता और रणनीतिक साख का प्रतीक बन चुकी है।
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