अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले ने अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में एक ओर जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने देशभर में चर्चा छेड़ दी है कि आखिर इस मामले की सच्चाई क्या है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल मामला जांच के चरण में है और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगे आरोप अभी तक न्यायालय या जांच एजेंसियों द्वारा सिद्ध नहीं हुए हैं।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक बाजपेयी ने इस पूरे विवाद पर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल और नेता वर्षों तक राम मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे और आज तक रामलला के दर्शन करने तक नहीं पहुंचे, वही अब मंदिर की व्यवस्था और दान को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक विपक्ष इस मुद्दे को आस्था से जोड़ने के बजाय केवल राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। उन्होंने कहा कि जनता इस राजनीति को अच्छी तरह समझती है और ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।
अशोक बाजपेयी ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित दान चोरी मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है और सरकार किसी भी स्तर पर जांच को प्रभावित नहीं करेगी। उनका कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, चाहे उसका पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
दूसरी ओर इस पूरे मामले में कानूनी पहलू भी तेजी से सामने आया है। अयोध्या के कुछ अधिवक्ताओं ने राम जन्मभूमि थाने में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग करते हुए पुलिस को लिखित तहरीर सौंपी है। वकीलों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को निष्पक्ष जांच के लिए एफआईआर दर्ज करनी चाहिए ताकि सभी तथ्यों की कानूनी जांच हो सके। उनका कहना है कि यदि पुलिस उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं करती है तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ेंगे।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह समझना भी बेहद आवश्यक है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ तहरीर दिए जाने या आरोप लगाए जाने मात्र से वह दोषी नहीं हो जाता। भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी भी आरोप की पुष्टि जांच, साक्ष्यों और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होती है। फिलहाल चंपत राय के खिलाफ लगाए गए आरोपों की न तो किसी जांच एजेंसी ने पुष्टि की है और न ही किसी अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया है। इसलिए इस मामले को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।
इस बीच जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा से जुड़े ठिकानों पर पुलिस लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। इसी क्रम में पुलिस की टीम रुदौली क्षेत्र के फगौली गांव स्थित आरोपी के घर पहुंची, जहां तलाशी अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी घर के आसपास मौजूद भूसे के बड़े ढेर में कथित तौर पर चोरी गए रुपये और अन्य संभावित सबूतों की तलाश करते हुए नजर आ रहे हैं।
वीडियो सामने आने के बाद इस मामले को लेकर लोगों की दिलचस्पी और भी बढ़ गई है। कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या चोरी की रकम वास्तव में वहां छिपाई गई थी या पुलिस केवल जांच के तहत हर संभावित स्थान की तलाशी ले रही थी। फिलहाल पुलिस ने इस तलाशी अभियान में क्या-क्या बरामद किया है, इसकी आधिकारिक और विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले में हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। यदि तलाशी के दौरान कोई नकदी, दस्तावेज़ या अन्य महत्वपूर्ण सबूत बरामद होते हैं तो उन्हें जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। वहीं यदि किसी नए व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उससे भी पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जांच का उद्देश्य केवल सच्चाई तक पहुंचना है, ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़े इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह का भ्रम न रहे।
फिलहाल राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले में राजनीति, कानूनी प्रक्रिया और पुलिस जांच—तीनों समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं। एक ओर विपक्ष सरकार और ट्रस्ट की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे राजनीतिक एजेंडा बताकर खारिज कर रही है। वहीं पुलिस और SIT अपनी जांच में जुटी हुई हैं। अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां किन तथ्यों तक पहुंचती हैं, क्या नए सबूत सामने आते हैं और न्यायिक प्रक्रिया के बाद इस चर्चित मामले में आखिर सच क्या निकलकर सामने आता है।
written by:- Anjali Mishra
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