भारत के खिलाफ लंबे समय से नापाक मंसूबे पालने वाला आतंकी संगठन अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) एक बार फिर सक्रिय हो उठा है। खुफिया एजेंसियों के ताजा इनपुट के अनुसार, भारत में सीधे हमले करने में नाकाम रहने के बाद यह संगठन अब अपनी रणनीति बदल रहा है। अल-कायदा अब ऐसे कट्टरपंथी युवाओं को तैयार करने की कोशिश कर रहा है, जो अकेले ही आतंकी हमले कर सकें यानी “लोन वुल्फ अटैक” को अंजाम देने में सक्षम हों। इस नई रणनीति ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, और पूरे देश में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AQIS ने भारत में अपने ऑपरेशनों की जिम्मेदारी असीम उमर नाम के आतंकी को दी है। असीम उमर संगठन का वह चेहरा है जो लंबे समय से दक्षिण एशिया में कट्टरपंथ फैलाने की कोशिशों में लगा हुआ है। माना जा रहा है कि वह अब भारत में ऐसे युवाओं को प्रेरित करने की कोशिश कर रहा है जो सोशल मीडिया और धार्मिक कट्टरता के माध्यम से ब्रेनवॉश हो चुके हैं। अल-कायदा की रणनीति यह है कि ऐसे व्यक्ति अकेले ही किसी भी सार्वजनिक स्थल, धार्मिक स्थल या सरकारी प्रतिष्ठान पर हमला कर सकें, जिससे आतंक का माहौल बनाया जा सके।
दरअसल, 2014 में अल-कायदा के मुखिया अयमान अल-जवाहिरी ने AQIS की स्थापना की थी। इस शाखा का उद्देश्य था — भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और म्यांमार जैसे देशों में अपनी जड़ें फैलाना। शुरुआत से ही AQIS ने भारत को अपने प्रमुख निशाने के रूप में देखा। लेकिन भारत की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, इंटेलिजेंस नेटवर्क और जनता के सहयोग के कारण संगठन की कोई बड़ी साजिश सफल नहीं हो पाई। पिछले एक दशक में कई बार AQIS से जुड़े मॉड्यूल्स का भंडाफोड़ किया गया, जिससे उनकी योजनाएं समय रहते विफल कर दी गईं।
हालांकि अब अल-कायदा की रणनीति बदलने से खतरा और बढ़ गया है। लोन वुल्फ अटैक का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इन्हें रोकना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि इसमें एक व्यक्ति या छोटा समूह शामिल होता है जो किसी संगठन से सीधे जुड़ा हुआ नहीं दिखता। ऐसे व्यक्ति अक्सर इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा अपनाते हैं, और फिर बिना किसी निर्देश के हमला कर देते हैं। पश्चिमी देशों में इस तरह के कई हमले हो चुके हैं, और अब AQIS उसी मॉडल को भारत में अपनाने की कोशिश कर रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों ने इस खतरे को देखते हुए देशभर में अपनी निगरानी बढ़ा दी है। NIA, IB और राज्य पुलिस की एंटी-टेरर यूनिट्स को अलर्ट कर दिया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, संदिग्ध चैट समूहों और कट्टरपंथी ऑनलाइन फोरम्स की निगरानी तेज की गई है। एजेंसियों का कहना है कि AQIS के नेटवर्क को जमीनी स्तर पर सक्रिय होने से पहले ही खत्म करना होगा। इसके लिए साइबर मॉनिटरिंग और स्थानीय इंटेलिजेंस सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।
यह भी गौर करने योग्य है कि पिछले कुछ महीनों में भारत में कुछ ऐसे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिन पर विदेशी आतंकी संगठनों से प्रेरित होने का संदेह था। ये सभी घटनाएं दिखाती हैं कि AQIS और ISIS जैसे संगठन अब पारंपरिक नेटवर्किंग के बजाय “ऑनलाइन कट्टरपंथ” पर भरोसा कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि युवा खुद ही उनकी विचारधारा से प्रभावित होकर हिंसा का रास्ता अपनाएं।
कुल मिलाकर, भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है “अदृश्य आतंकवाद” की। अल-कायदा का यह बदला हुआ रूप सीधा हमला नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे समाज में अस्थिरता और डर फैलाने की कोशिश करता है। लेकिन भारत की सुरक्षा एजेंसियां पहले ही कई बार ऐसे खतरों को नाकाम कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनता सतर्क रहे और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना दे, तो AQIS जैसे संगठनों के मंसूबे एक बार फिर नाकाम हो जाएंगे।
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