उत्तर प्रदेश सरकार ने आम जनता को एक बड़ी राहत दी है। अब राज्य में खतौनी से जुड़ी प्रक्रियाओं में एक नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसे “गाटावार अंश निर्धारण” कहा जा रहा है। पहले यह प्रक्रिया गांववार की जाती थी, जिसके कारण वरासत, नामांतरण और अन्य राजस्व संबंधित कार्यों में काफी देरी होती थी। लेकिन अब इस नई व्यवस्था के लागू होने से खतौनी अपडेट करना कहीं अधिक तेज़ और पारदर्शी हो गया है।
राजस्व परिषद की आयुक्त कंचन वर्मा ने इस नई प्रणाली को लागू करने के निर्देश प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को जारी कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि अब गाटे (जमीन के हिस्से) के स्तर पर अंश निर्धारण किया जाएगा, जिससे पूरे गांव की खतौनी किसी एक व्यक्ति के कार्य अधूरा रहने के कारण नहीं रुकेगी। पहले होता यह था कि अगर किसी एक भूमि मालिक की जानकारी या नामांतरण लंबित रहता था, तो पूरे गांव की खतौनी का अपडेट रोका जाता था। इस कारण किसानों और आम लोगों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता था।
भूलेख पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के लगभग 1.06 लाख गांवों में कुल 7.62 करोड़ गाटे दर्ज हैं। इनमें से अब तक लगभग 6.56 करोड़ गाटों का अंश निर्धारण कार्य पूरा कर लिया गया है। शेष गाटों पर तेजी से काम जारी है। यह दर्शाता है कि सरकार ने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर इस प्रक्रिया को काफी प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया है। इससे अब ग्रामीणों को राजस्व कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और खतौनी अपडेट का काम उनके क्षेत्र में ही ऑनलाइन माध्यम से पूरा होगा।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब किसी एक गाटे का कार्य अधूरा रहने से पूरे गांव की प्रक्रिया ठप नहीं होगी। यानी यदि किसी भूमि स्वामी के दस्तावेज़ या नामांतरण में देरी होती है, तो भी बाकी किसानों की खतौनी का अपडेट रोका नहीं जाएगा। इससे किसानों को समय पर उनकी भूमि का रिकॉर्ड मिल सकेगा और वरासत या नामांतरण जैसे जरूरी कार्य समय पर पूरे होंगे।
राज्य सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। यह न केवल जनता को सुविधा देगा बल्कि राजस्व विभाग की पारदर्शिता और दक्षता को भी बढ़ाएगा। इससे जमीन विवादों में कमी आएगी, और डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को भी बल मिलेगा। अब लोग भूलेख पोर्टल पर अपनी खतौनी की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे, और नामांतरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह फैसला उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि प्रबंधन को आधुनिक और सरल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे किसानों, आम नागरिकों और प्रशासन तीनों को लाभ मिलेगा। जहां पहले खतौनी से जुड़ी फाइलें महीनों तक अटकी रहती थीं, अब वही काम कुछ दिनों में पूरा हो सकेगा। यह बदलाव न केवल तकनीकी सुधार का उदाहरण है, बल्कि यह दिखाता है कि सरकार जनता की परेशानियों को समझते हुए व्यावहारिक समाधान की ओर बढ़ रही है।
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