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बसंत पंचमी 2026: प्रयागराज में आस्था का सैलाब, माघ मेले का चौथा स्नान पर्व उमड़ा श्रद्धालुओं से !

आज पूरे देश में बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन विशेष रूप से विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा और शुभ कार्य करने का सर्वोत्तम समय दोपहर 12:12 से 12:54 बजे तक रहेगा। वहीं, सुबह 8:33 से 9:53 बजे, 11:13 से 12:33 बजे और दोपहर 3:13 से शाम 4:33 बजे तक का समय अशुभ माना गया है। आज अमृत काल नहीं है, इसलिए सभी महत्वपूर्ण काम शुभ मुहूर्त में ही करना बेहतर रहेगा।

प्रयागराज में बसंत पंचमी के मौके पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। माघ मेले का आज चौथा स्नान पर्व है, जिसमें लाखों श्रद्धालु संगम के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। इस अवसर पर शहर का धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने लायक है। हर ओर भक्तों की भीड़ और रंग-बिरंगे धार्मिक झंडे, दीप और पूजा सामग्री की चमक इस पर्व की भव्यता को और बढ़ा रही है।

भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया है। सुरक्षा और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रयागराज पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्नान घाट तैयार किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें।

आज के स्नान पर्व में लगभग एक करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में स्नान करने का अनुमान है। इस भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने वीआईपी प्रोटोकॉल लागू नहीं किया है, ताकि सभी भक्त समान रूप से अपने धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो सकें। स्नान घाटों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

सुरक्षा के लिए पुलिस के अलावा पीएसी, आरएएफ, फ्लड कंपनी और गोताखोरों की तैनाती की गई है। प्रशासन का पूरा प्रयास है कि किसी भी आपात स्थिति या भीड़ से उत्पन्न होने वाली समस्या को रोका जा सके। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है।

माघ मेले का यह चौथा स्नान पर्व केवल आस्था का अवसर नहीं है, बल्कि यह स्थानीय पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी सक्रिय करता है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न पांडाल, पूजा सामग्री की दुकानें और भोजनालय लगाए गए हैं। इससे स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ हो रहा है।

धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी का यह पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दिन सरस्वती पूजा के साथ ही विद्या, ज्ञान और कला की देवी की उपासना की जाती है। श्रद्धालु अपने बच्चों, परिवार और मित्रों के साथ इस दिन की पूजा में भाग लेते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

इस वर्ष भी बसंत पंचमी और माघ मेले का यह आयोजन पूरी तरह से सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए आनंददायक बनाने की पूरी तैयारी के साथ संपन्न हो रहा है। प्रशासन और स्थानीय समुदाय दोनों मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि यह पावन पर्व श्रद्धालुओं के लिए यादगार और सुरक्षित अनुभव बन जाए।

written by :- Anjali Mishra

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