इटावा जिले के दादनपुर गांव में जातीय तनाव की आग भड़क उठी है। एक कथावाचक का जबरन मुंडन कर देना इस विवाद का मुख्य कारण बना, जिसने पूरे गांव का माहौल बिगाड़ दिया। कथावाचक यादव समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, और इस घटना को उनके सम्मान और पहचान पर हमला माना जा रहा है। इसके विरोध में समुदाय में जबरदस्त नाराजगी फैल गई है।
घटना के बाद अहिर रेजीमेंट ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जो जल्द ही हिंसक हो गया। पथराव शुरू हुआ और हालात को काबू में लाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान 19 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया, जबकि कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव व्याप्त है और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
अब इस मामले में ब्राह्मण महासभा ने भी हस्तक्षेप करते हुए दादनपुर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। इससे प्रशासन की चिंताएं और बढ़ गई हैं, क्योंकि दोनों पक्षों का आमने-सामने आना माहौल को और अधिक विस्फोटक बना सकता है। प्रशासन को डर है कि स्थिति बेकाबू हो सकती है।
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पुलिस और प्रशासन ने पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया है। हर चौराहे और गली में पुलिसबल तैनात है। सोशल मीडिया पर अफवाहों और भड़काऊ संदेशों को फैलने से रोकने के लिए साइबर सेल को एक्टिव कर दिया गया है। अफसर लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, लेकिन तनाव की लहर कम होती नजर नहीं आ रही।
यह पूरा मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था की नाकामी का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जातीय मुद्दे कितनी जल्दी हिंसा में बदल सकते हैं। जरूरत है कि प्रशासन सभी पक्षों से संवाद स्थापित करे और सख्त कार्रवाई कर उदाहरण पेश करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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