back to top
Thursday, May 7, 2026
29 C
Lucknow
HomeAdministration"वर्ल्ड क्लास एजुकेशन मॉडल" के दावे फेल !

“वर्ल्ड क्लास एजुकेशन मॉडल” के दावे फेल !

दिल्ली के सरकारी स्कूलों की हालत एक बार फिर चर्चा में है — और इस बार वजह कोई परीक्षा परिणाम या नया डिजिटल स्मार्ट क्लासरूम नहीं, बल्कि बारिश के बाद सामने आई बदहाल और डरावनी तस्वीरें हैं। टपकती हुई छतें, जलभराव से लबालब क्लासरूम, कीचड़ से भरे स्कूल परिसर और गिरी हुई प्लास्टर की दीवारें… ये सब उस शिक्षा मॉडल की जमीनी हकीकत उजागर कर रहे हैं जिसे सरकार “वर्ल्ड क्लास” बताकर पेश करती रही है।

बारिश के चलते स्कूलों के भीतर घुटनों तक पानी भर जाना, बच्चों का फिसलकर गिरना, क्लासरूम में बिजली का खतरा और टॉयलेट्स तक पहुंचने में परेशानी — ये वो समस्याएं हैं जिनका सामना राजधानी के बच्चे और शिक्षक इस मॉनसून में कर रहे हैं। स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे मूलभूत अधिकारों के अभाव में पढ़ाई का माहौल तो पूरी तरह से तहस-नहस हो चुका है। स्कूलों में मौजूद शिक्षकों का कहना है कि वे खुद डरे हुए हैं, और लगातार ऊपर से टपकते पानी और कमजोर इमारतों के नीचे क्लास चलाना किसी जंग से कम नहीं है।

विपक्षी दलों और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों ने इस स्थिति को सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा की गिरती जगह करार दिया है। उनका कहना है कि “विज्ञापन और भाषणों में शिक्षा को सर्वोच्च दर्जा” देने वाली सरकार ज़मीनी स्तर पर असफल रही है। जहां करोड़ों का बजट हर साल स्कूलों के नाम पर पास होता है, वहीं उसकी असल स्थिति यह सवाल उठाती है — वो पैसा आखिर जा कहां रहा है? क्या सिस्टम में लीकेज है या फिर ये सिर्फ राजनीतिक ब्रांडिंग का एक हिस्सा?

Also Read: चुनाव आयोग का नया आदेश: अब 45 दिन बाद डिलीट होंगे वीडियो, बढ़ी राजनीतिक हलचल

इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया भी उबल पड़ा है। कई अभिभावकों ने फोटो और वीडियो शेयर करते हुए चिंता जताई है कि उनके बच्चों को किस खतरनाक हालात में पढ़ाई के लिए मजबूर किया जा रहा है। कुछ माता-पिता ने सवाल किया कि क्या सरकारी अधिकारी और मंत्री अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में भेज सकते हैं? वहीं, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर चमकदार पोस्टर और आंकड़ों की चमक नहीं, बल्कि ज़मीनी ईमानदारी की ज़रूरत होती है।

अब सवाल सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता का नहीं है, बल्कि बच्चों की जान और भविष्य दोनों का है। अगर दिल्ली जैसे शहर में सरकारी स्कूल इस हाल में हैं, तो देश के दूरदराज़ इलाकों की स्थिति का अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं। ज़रूरत है कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक बनाम गैर-राजनीतिक के चश्मे से न देखे, बल्कि इसे एक राष्ट्रीय आपात स्थिति की तरह ले और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए। वरना ‘वर्ल्ड क्लास एजुकेशन’ का सपना कागज़ों में सिमट कर रह जाएगा और आने वाली पीढ़ी इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाएगी।

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Livenewsx
Livenewsxhttp://www.livenewsx.in
we are digtal news platform.we are covering social facts politics national international news breaking
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments