आध्यात्मिक जगत की दो प्रमुख हस्तियों – अनिरुद्धाचार्य जी महाराज और प्रेमानंद महाराज – के हालिया बयानों ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त विवाद खड़ा कर दिया है। विशेष रूप से महिलाओं को लेकर दिए गए कथनों पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स ने इसे महिला विरोधी बताते हुए आलोचना की, तो वहीं कुछ ने इसे गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया बयान करार दिया।
अनिरुद्धाचार्य जी पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रवचन में महिलाओं को लेकर एक ऐसा वक्तव्य दिया, जो समाज के एक बड़े वर्ग को अस्वीकार्य लगा। सोशल मीडिया पर वीडियो क्लिप्स वायरल होते ही यूजर्स ने उन्हें घेर लिया और जमकर ट्रोल किया। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या आध्यात्मिक मंच से इस तरह की बातों का प्रचार उचित है? वहीं, प्रेमानंद महाराज का भी एक अलग बयान सामने आया, जिसे कुछ लोगों ने स्त्री-विरोधी करार दिया।
हालांकि, मामला यहीं नहीं रुका। टीवी और बॉलीवुड से जुड़े चर्चित चेहरे राजीव अदातिया और अभिनेत्री अंकिता लोखंडे ने दोनों संतों का समर्थन करते हुए बयान दिया कि बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि ये कथन किसी एक लिंग के विरोध में नहीं थे, बल्कि समाज में मौजूद कुछ प्रवृत्तियों की ओर इशारा करते थे। दोनों ने लोगों से अपील की कि किसी भी संत के बयान को पूरी बात समझे बिना जज न करें।
इस समर्थन के बावजूद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ यूजर्स ने राजीव और अंकिता को भी ट्रोल करना शुरू कर दिया है और उन पर ‘सस्ती लोकप्रियता’ बटोरने का आरोप लगाया है। वहीं, संतों के अनुयायियों ने उन्हें ‘सत्य की रक्षा’ करने वाला बताया और समर्थन में कई पोस्ट्स वायरल किए।
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इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आध्यात्मिक मंचों से सामाजिक मुद्दों पर दिए गए बयानों की सीमाएं क्या होनी चाहिए? क्या आध्यात्मिकता के नाम पर दिए गए हर कथन को धार्मिक चादर में लपेटकर नजरअंदाज कर दिया जाए, या फिर सार्वजनिक मंच से बोले गए हर शब्द की ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए?
फिलहाल मामला शांत होता नहीं दिख रहा। कई महिला संगठनों ने इन बयानों की निंदा करते हुए संतों से सार्वजनिक माफी की मांग की है। दूसरी ओर, संतों की तरफ से अभी तक कोई स्पष्ट सफाई सामने नहीं आई है। अब देखना यह है कि यह विवाद धार्मिक आस्था की सीमा में सिमटेगा, या सामाजिक चेतना के दायरे में बड़ी बहस का कारण बनेगा।
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