उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से सामने आया छांगुर बाबा प्रकरण अब तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में यह पाया गया है कि छांगुर बाबा के कथित अवैध कारनामों में प्रशासनिक अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका रही है।
STF की रिपोर्ट के अनुसार, दो इंस्पेक्टर, दो क्षेत्राधिकारी (CO) और एक उपजिलाधिकारी (SDM) की भूमिका पूरी तरह से संदेह के घेरे में है। इन पर आरोप है कि इन्होंने अपने प्रभाव और पद का दुरुपयोग करते हुए छांगुर बाबा को जमीन कब्जाने में सहयोग किया। साथ ही फर्जी मुकदमे दर्ज करवा कर कई निर्दोष लोगों को झूठे केसों में फंसाने का भी प्रयास किया गया।
छांगुर बाबा पर पहले से ही जमीन कब्जाने, राजनीतिक रसूख के जरिए लोगों को धमकाने और स्थानीय प्रशासन में अपनी पकड़ बनाने के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन अब जब STF की जांच में यह सामने आया कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी इस पूरी साज़िश में शामिल थे, तो मामला और गंभीर हो गया है। यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सत्ता, प्रशासन और अपराध का खतरनाक गठजोड़ उजागर होता दिखाई दे रहा है
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जानकारी के मुताबिक छांगुर बाबा ने बलरामपुर और आस-पास के इलाकों में कई जमीनों पर अवैध कब्जे किए। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि कथित रूप से प्रशासनिक अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं। कुछ मामलों में तो रिपोर्ट दर्ज कराने वाले पीड़ितों पर ही उल्टे मुकदमे दर्ज करवा दिए गए। यह पूरा तंत्र भय, सत्ता और संरक्षण का ऐसा उदाहरण बन गया था, जिसमें न्याय की उम्मीद ही दम तोड़ती दिखी।
अब जब STF की रिपोर्ट सामने आ चुकी है, तो शासन स्तर पर भी हलचल मच गई है। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही आरोपित अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है। साथ ही, सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी और जिम्मेदार अफसरों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। यह देखना अहम होगा कि क्या यह कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहती है या ऊपर तक जवाबदेही तय होती है।
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