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इटावा बवाल: कथावाचकों पर FIR के बाद हंगामा, फायरिंग-पथराव से तनाव

इटावा जिले में यादव कथावाचकों के साथ हुई मारपीट और बदसलूकी का मामला अब व्यापक राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है। इस पूरे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है, जहां FIR दर्ज होने के बाद हालात और ज्यादा बिगड़ते नजर आ रहे हैं। कथावाचक मुकुट मणि यादव और संत कुमार यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद यादव समाज में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब प्रतिक्रिया हो रही है, जहां लोग इसे एक विशेष समुदाय पर हमला बताकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।

इस बीच इटावा के दादरपुर गांव में तनाव का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, अहीर रेजिमेंट की मांग को लेकर वर्षों से आंदोलन कर रहे कार्यकर्ता अचानक बड़ी संख्या में गांव के बाहर इकट्ठा हो गए। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, माहौल तनावपूर्ण होता गया। प्रदर्शनकारियों ने कथावाचकों के खिलाफ FIR को अन्यायपूर्ण बताया और इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी, जोरदार भाषण और आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब भीड़ ने पुलिस की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए पथराव शुरू कर दिया। भीड़ की ओर से की गई पत्थरबाजी में पुलिस वाहन को काफी नुकसान हुआ। पुलिस ने पहले भीड़ को शांत करने की कोशिश की, मगर जब हालात बेकाबू होते दिखे, तो मजबूरी में पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इससे मौके पर अफरातफरी मच गई। बताया जा रहा है कि कुछ प्रदर्शनकारी घायल भी हुए हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।

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पथराव और फायरिंग की घटना के बाद पुलिस और प्रशासन सतर्क हो गया है। भारी पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है ताकि स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके। गांव में शांति बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने पंचायत प्रमुखों और समाज के वरिष्ठ लोगों से बातचीत की है। फिलहाल दादरपुर गांव और उसके आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं, जिससे अफवाहें न फैल सकें।

इस घटना ने एक बार फिर जातीय तनाव और समाज के बीच बढ़ती असहिष्णुता के मुद्दे को सामने ला दिया है। जहां एक ओर कथावाचकों के खिलाफ कार्रवाई से यादव समुदाय में रोष है, वहीं प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने समय रहते विवाद को शांत क्यों नहीं किया। अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले को कैसे संभालते हैं, और क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा या यह घटना सिर्फ एक और राजनीतिक बहस का मुद्दा बनकर रह जाएगी।

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