बच्चों के लिए खरीदे जाने वाले बिस्किट, नमकीन, चिप्स, जूस और रोजमर्रा के दूसरे पैक्ड खाद्य उत्पादों को खरीदते समय अधिकांश लोग सबसे पहले उनकी एक्सपायरी डेट देखते हैं। यही तारीख यह भरोसा दिलाती है कि उत्पाद खाने के लिए सुरक्षित है। लेकिन अगर वही एक्सपायरी डेट ही बदली हुई हो, तो यह भरोसा एक बड़े खतरे में बदल सकता है। दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के विश्वास दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह कथित तौर पर एक्सपायर हो चुके खाद्य उत्पादों को बेहद कम कीमत पर खरीदता था। इसके बाद उन पैकेटों पर छपी पुरानी एक्सपायरी डेट को विशेष तरीकों से मिटाया जाता था और उसकी जगह नई तारीख प्रिंट कर दी जाती थी। नई पैकिंग या बदली हुई तारीख के कारण ये उत्पाद देखने में बिल्कुल सामान्य लगते थे और फिर इन्हें दोबारा बाजार में बेच दिया जाता था।
जांच में सामने आया है कि यह कथित अवैध कारोबार कोई नया नहीं था। पुलिस का दावा है कि यह रैकेट लगभग 17 वर्षों से संचालित हो रहा था। यदि जांच में यह दावा सही साबित होता है, तो यह खाद्य उत्पादों से जुड़े सबसे लंबे समय तक चलने वाले कथित फर्जीवाड़ों में से एक माना जा सकता है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और आगे और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के दौरान इस मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। छापेमारी में लगभग 35 लाख रुपये मूल्य के 57 प्रकार के खाद्य उत्पाद बरामद किए गए, जिन पर कथित तौर पर एक्सपायरी डेट बदलने का काम किया गया था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि ये उत्पाद किन-किन बाजारों और दुकानों तक पहुंचाए गए थे और इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
यह मामला केवल धोखाधड़ी या फर्जी लेबल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे लोगों की सेहत से जुड़ा हुआ है। एक्सपायर हो चुके खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता समय के साथ प्रभावित हो सकती है और उनका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोगों के लिए ऐसे उत्पाद गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पैक्ड खाद्य उत्पाद खरीदते समय केवल एक्सपायरी डेट देखना पर्याप्त नहीं है। पैकेजिंग में किसी प्रकार की छेड़छाड़, लेबल की असामान्य प्रिंटिंग, दोहरी स्टिकरिंग, धुंधली तारीख या पैकेट पर किसी तरह की असमानता भी ध्यान से जांचनी चाहिए। यदि कोई उत्पाद असामान्य रूप से सस्ता मिल रहा हो, तो उसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाना जरूरी है।
उपभोक्ताओं के लिए यह भी जरूरी है कि वे खाद्य उत्पाद केवल विश्वसनीय दुकानों, अधिकृत विक्रेताओं या प्रतिष्ठित रिटेल स्टोर से ही खरीदें। खरीदारी के बाद बिल सुरक्षित रखना भी एक अच्छी आदत है, ताकि किसी शिकायत की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई की जा सके। यदि किसी उत्पाद की पैकेजिंग या एक्सपायरी डेट संदिग्ध लगे, तो उसकी शिकायत संबंधित खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण या स्थानीय प्रशासन से की जा सकती है।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जांच के निष्कर्षों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस कथित रैकेट का दायरा कितना बड़ा था और कितने उपभोक्ता इससे प्रभावित हुए। लेकिन इस घटना ने एक महत्वपूर्ण संदेश जरूर दिया है खाद्य उत्पाद खरीदते समय सिर्फ एक्सपायरी डेट देखना ही काफी नहीं, बल्कि उत्पाद का स्रोत, पैकेजिंग और विक्रेता की विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
written by:- Anjali Mishra
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
