बीकानेर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब केंद्रीय मंत्री पद न मिलने और बाहरी नेताओं को मंत्री बनाए जाने को लेकर सवाल पूछा गया, तो भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने बड़ी ही बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, “सचिन तेंदुलकर अगर बेंच पर भी बैठा हो, तो उसके रिकॉर्ड हमेशा उसके साथ रहते हैं।” उनके इस बयान ने यह स्पष्ट किया कि वे अपनी भूमिका को लेकर किसी तरह की असंतुष्टि नहीं रखतीं।
स्मृति ईरानी ने आगे कहा कि टीम का कप्तान ही तय करता है कि कौन खिलाड़ी मैदान पर उतरेगा और किसे विश्राम दिया जाएगा। उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि वह पार्टी के निर्णयों का सम्मान करती हैं और हर कार्यकर्ता को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी चाहिए।
उन्होंने यह भी दोहराया कि वह आज भी पार्टी की एक समर्पित कार्यकर्ता हैं। स्मृति ने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो कुछ भी दिया है, वह उसका हमेशा आभार मानती हैं। उन्होंने किसी भी पद को अपनी पहचान का आधार मानने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी असली पहचान भाजपा की विचारधारा और संगठन से जुड़ाव है।
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स्मृति ईरानी ने यह भी संकेत दिया कि उनकी प्राथमिकता अब भी जनता की सेवा और पार्टी की मजबूती है, न कि पद या प्रतिष्ठा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक कार्यकर्ता के नाते वे हर परिस्थिति में संगठन के साथ खड़ी हैं और पार्टी के निर्णयों के साथ चलना ही उनका कर्तव्य है।
इस दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं और मीडिया प्रतिनिधियों ने स्मृति ईरानी के उत्तरों में राजनीतिक परिपक्वता और संगठन के प्रति निष्ठा की झलक देखी। उनके जवाबों से यह स्पष्ट हुआ कि वे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर पार्टी की एकजुटता और दिशा को प्राथमिकता देती हैं।
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