back to top
Thursday, March 5, 2026
27.3 C
Lucknow
Homeबड़ी खबरशेयर बाजार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी,

शेयर बाजार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी,

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक जून 2025 तक देशभर में महिलाओं की शेयर बाज़ार में भागीदारी लगातार बढ़ी है। यह रुझान बताता है कि अब निवेश का दायरा केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाएँ भी सक्रिय रूप से इक्विटी मार्केट में कदम रख रही हैं। यह बदलाव भारतीय वित्तीय परिदृश्य में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि बड़े राज्यों में महिला निवेशकों की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ी है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र जैसे निवेशकों के लिहाज़ से सबसे बड़े राज्य में महिलाओं की हिस्सेदारी FY23 में 25.6% थी, जो अब जून 2025 तक बढ़कर 28.4% तक पहुँच गई है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि शहरी और अपेक्षाकृत विकसित राज्यों में महिलाओं की वित्तीय साक्षरता और निवेश की इच्छा दोनों ही लगातार बढ़ रही हैं।

महिला निवेशकों की इस बढ़ोतरी का असर केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य राज्यों में भी इसका रुझान देखने को मिला है। राज्यों में वित्तीय जागरूकता कार्यक्रमों, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की आसान उपलब्धता और रोजगार में बढ़ती महिला भागीदारी ने इस बदलाव को बल दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और अधिक बढ़ सकती है।

Also Read: चुनाव आयोग का नया आदेश: अब 45 दिन बाद डिलीट होंगे वीडियो, बढ़ी राजनीतिक हलचल


हालाँकि, रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है—युवा निवेशकों की हिस्सेदारी में गिरावट। मार्च 2024 तक 30 साल से कम उम्र के निवेशकों की संख्या 40% थी, जो मार्च 2025 में घटकर 39.5% रह गई। जून 2025 तक यह आँकड़ा और नीचे जाकर 39% पर आ गया। यह हल्की गिरावट बताती है कि युवा वर्ग की निवेश प्रवृत्ति में थोड़ी मंदी आई है।

विश्लेषकों का कहना है कि युवा निवेशकों की हिस्सेदारी में यह कमी कई कारणों से हो सकती है। महंगाई का दबाव, नौकरी के शुरुआती वर्षों में खर्चों की अधिकता और पारंपरिक बचत साधनों की ओर झुकाव कुछ प्रमुख कारण हैं। वहीं, महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से निवेशक आधार में संतुलन आ रहा है, जो बाज़ार को अधिक विविध और स्थिर बना सकता है।

कुल मिलाकर, NSE की यह रिपोर्ट भारत के शेयर बाजार में बदलते रुझानों की तस्वीर पेश करती है। जहाँ एक ओर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इसे नई दिशा दे रही है, वहीं युवाओं की थोड़ी गिरती हिस्सेदारी नीति-निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों के लिए चिंता का विषय हो सकती है। आने वाले समय में यदि वित्तीय साक्षरता और निवेश के अवसरों को और व्यापक बनाया गया, तो भारत का निवेश परिदृश्य और भी सशक्त बन सकता है।

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Livenewsx
Livenewsxhttp://www.livenewsx.in
we are digtal news platform.we are covering social facts politics national international news breaking
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments