जम्मू-कश्मीर में हाल ही में अनंतनाग जिले के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई जम्मू-कश्मीर मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद लिया गया। विशेष सत्र 28 अप्रैल 2025 को सुबह 10:30 बजे जम्मू में आयोजित होगा।
पहलगाम आतंकी हमले की पृष्ठभूमि
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन मैदानी क्षेत्र में आतंकवादियों ने एक रिसॉर्ट में पर्यटकों पर हमला किया, जिसमें एक पर्यटक की मौत हो गई और 12-13 लोग घायल हुए। इस हमले की जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सहित कई नेताओं ने कड़ी निंदा की। उपराज्यपाल ने इसे “कायरतापूर्ण” बताते हुए कहा कि हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस को तलाशी अभियान शुरू करने के निर्देश दिए, और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन को आदेश दिए।
विशेष सत्र का उद्देश्य
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मंत्रिपरिषद ने पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा स्थिति और इससे उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए विशेष सत्र बुलाने की सलाह दी। यह सत्र जम्मू-कश्मीर में हाल के आतंकी हमलों, विशेषकर पर्यटकों और आम नागरिकों को निशाना बनाने वाली घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और नीतिगत उपायों पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, यह सत्र जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को और मजबूती प्रदान करने का अवसर भी हो सकता है, जिसे लेकर उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री पहले भी अपनी प्रतिबद्धता जता चुके हैं।
LG मनोज सिन्हा का बयान
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पहलगाम हमले के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “आतंकवादियों और उनके समर्थकों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। जो भी आतंकवाद को पनाह देगा, उसका घर जमींदोज कर दिया जाएगा।” उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह नष्ट करने के लिए खुली छूट देने की बात कही। सिन्हा ने यह भी आश्वासन दिया कि घायल पर्यटकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा दी जा रही है, और एक घायल पर्यटक को जीएमसी अनंतनाग में भर्ती कराया गया है।नेताओं की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले को “घृणास्पद” करार देते हुए कहा कि यह घटना हाल के वर्षों में आम लोगों पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक है। उन्होंने अपनी सहयोगी मंत्री सकीना इटू को घायलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए अस्पताल भेजा और स्वयं श्रीनगर लौटने की बात कही। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी हमले की निंदा करते हुए इसे कश्मीर की पर्यटन संस्कृति के खिलाफ बताया और गहन जांच की मांग की।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई
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पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी), और सीआरपीएफ की 116 बटालियन ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि हमला बैसरन मैदानी क्षेत्र में हुआ, और आतंकवादियों की तलाश के लिए क्षेत्र में व्यापक ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पहलगाम हमले ने जम्मू-कश्मीर में पर्यटन क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेष सत्र में सुरक्षा ऑडिट, रणनीतिक चौकियों पर नाकाबंदी, रात की गश्त, और आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए ठोस उपायों पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भी इस सत्र में प्रमुखता से उठ सकती है।यह विशेष सत्र जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, जो क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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