राजधानी लखनऊ में युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए जोर-शोर से शुरू हुई सीएम युवा उद्यमी विकास अभियान योजना अभी भी अपने लक्ष्य से कोसों दूर है। बैंकों की मनमानी व ढिलाईपूर्ण रवैये की वजह से उद्योग विभाग ने 2000 प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, लेकिन कर्ज सिर्फ 482 प्रोजेक्ट यानी करीब 25 प्रतिशत को ही मिल सका है।
उधर, बैंकों ने भी जिन 904 प्रोजेक्ट को कर्ज की मंजूरी दी, उनमें से सिर्फ 482 को ही कर्ज दिया गया। ऐसे में खत्म होते वित्तीय वर्ष में शेष 422 आवेदकों की सब्सिडी लटक सकती है।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के तहत जनपद लखनऊ को 3500 प्रोजेक्ट का लक्ष्य दिया गया था। इसमें 3500 आवेदकों को 5-5 लाख रुपये तक का कर्ज वितरण करना था। लेकिन खत्म होते वित्तीय वर्ष में उद्योग विभाग सिर्फ 2000 प्रोजेक्ट यानी करीब 60 प्रतिशत को ही मंजूरी दे सका।
उसमें भी कर्ज के लिए मंजूर हुए 904 प्रोजेक्ट में से सिर्फ 482 को ही कर्ज मिल सका है। ऐसे में यदि 31 मार्च तक शेष 422 आवेदकों को कर्ज नहीं मिला तो खत्म होते वित्तीय वर्ष में इनकी 10 प्रतिशत तक की सब्सिडी लटक सकती है। पांच लाख के कर्ज के हिसाब से यह 50 हजार रुपये प्रति प्रोजेक्ट बनती है।
लिहाजा, उद्योग विभाग के अफसर से लेकर कर्मचारी तक हर आवेदक को फोन कर जल्द से जल्द सभी कार्यवाहियां पूरी कर इसी वित्तीय वर्ष में अपना कर्ज हासिल करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।वित्तीय वर्ष 2024-25 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक सभी को बिना किसी ट्रेनिंग के 5 लाख तक का कर्ज दिया गया। इसमें जिन 482 आवेदकों को कर्ज मिला है, उनको तो 50 हजार रुपये की सब्सिडी आसानी से मिल जाएगी।
लेकिन जिन 422 प्रोजेक्ट के आवेदकों को कर्ज की मंजूरी तो हुई, लेकिन कर्ज नहीं मिला, उनको अगले वित्तीय वर्ष में सब्सिडी हासिल करने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।विभागीय सूत्रों के मुताबिक, सब्सिडी पाने के लिए प्रोजेक्ट के खर्चे के बिल भी उसी वित्तीय वर्ष के होने चाहिए, जिस वित्तीय वर्ष में कर्ज स्वीकृत हुआ है। अगले वित्तीय वर्ष से सब्सिडी दिलाने से पहले सबकी ट्रेनिंग भी जरूरी होगी। इस साल यह तय था कि पहले कर्ज दे दें, इसके बाद सभी की एक साथ ट्रेनिंग कराई जाएगी।

