राजा कोलंदर प्रयागराज के शंकरगढ़ का निवासी है। उसका असली नाम राम निरंजन कोल है। वह नैनी स्थित केंद्रीय आयुध भंडार (सीओडी) छिवकी में कर्मी था। राम निरंजन ब्याज पर रुपये देने के साथ ही राजनीति के मैदान में भी सक्रिय था। उसकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य चुनी गई थी। उसने अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बना ली। इस कारण लोग उसे राजा कहने लगे। मनोज और रवि की हत्या के बाद भी राजा कोलंदर पर केस दर्ज नहीं हुआ था। उसकी पहचान सामने नहीं आई थी। रिटायर्ड आईपीएस राजेश पांडेय के अनुसार, वर्ष 2000 तक राजा कोलंदर के खिलाफ किसी थाने पर कोई केस दर्ज नहीं था।
राजा कोलंदर का भयावह चेहरा एक पत्रकार की हत्याकांड के बाद सामने आया। 14 दिसंबर 2000 को पत्रकार धीरेंद्र सिंह के गायब होने के बाद स्थिति बदली। 18 दिसंबर को यूपी-एमपी बॉर्डर पर रीवा के पास उसकी सिरकटी लाश बरामद की गई। उसकी पहचान पत्रकार धीरेंद्र के रूप में हुई। पूरे जंगल में छानने पर भी धीरेंद्र का सिर नहीं मिला। इसके बाद जांच में सामने आया कि 14 दिसंबर की शाम धीरेंद्र के साथ राजा को बाइक पर देखा गया।
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राजा कोलंदर के धीरेंद्र के साथ देखे जाने की जानकारी पर प्रयागराज पुलिस ने उसे थाने बुलाकर पूछताछ शुरू की। काफी देर इधर-उधर की बात करने के बाद धीरेंद्र सिंह की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया। हालांकि सिर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। राजनीतिक ताकत को देखते हुए उससे अधिक पूछताछ नहीं हुई। हत्या के मामले में उसे जेल भेज दिया। हालांकि, धीरेंद्र हत्याकांड ने तूल पकड़ा।
राजा कोलंदर के धीरेंद्र के साथ देखे जाने की जानकारी पर प्रयागराज पुलिस ने उसे थाने बुलाकर पूछताछ शुरू की। काफी देर इधर-उधर की बात करने के बाद धीरेंद्र सिंह की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया। हालांकि सिर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। राजनीतिक ताकत को देखते हुए उससे अधिक पूछताछ नहीं हुई। हत्या के मामले में उसे जेल भेज दिया। हालांकि, धीरेंद्र हत्याकांड ने तूल पकड़ा।
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