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सावन का अंतिम सोमवार: काशी में श्रद्धा का सैलाब”

वाराणसी में सावन के आखिरी सोमवार को आस्था और भक्ति की अनुपम छवि देखने को मिली। रिमझिम बारिश के बीच लाखों श्रद्धालु बाबा श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। आसमान से गिरती बूंदें भी भक्तों के जोश को कम न कर सकीं। पूरे शहर में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे थे और काशी एक बार फिर श्रद्धा की रंगीन छटा में रंगी हुई नजर आई।

सुबह से ही मंदिर परिसर में लंबी कतारें लग गई थीं। पुरुषों के साथ महिलाएं, युवा और बुजुर्ग – हर वर्ग के भक्त शिव के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। कांवड़ यात्रा पर आए हजारों शिवभक्त गंगाजल लेकर बाबा विश्वनाथ को अर्पित करने पहुंचे। प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा और व्यवस्थाएं की गई थीं, बावजूद इसके दर्शन के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ा, लेकिन किसी के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी।

बारिश के चलते सड़कें गीली हो चुकी थीं, कई जगह कीचड़ भी हुआ, लेकिन भक्तों की आस्था इतनी प्रबल थी कि कोई पीछे नहीं हटा। गीले वस्त्रों में, छाता संभाले हुए या सिर पर गमछा रखे – श्रद्धालु बाबा के दरबार में पहुंचते रहे। कई भक्तों ने घंटों भीगते हुए कतार में खड़े रहकर दर्शन किए। यह नजारा इस बात का प्रतीक था कि मौसम कितना भी प्रतिकूल क्यों न हो, अगर मन में श्रद्धा हो, तो हर कठिनाई छोटी लगती है।

शाम को बाबा विश्वनाथ की भव्य आरती ने माहौल को और दिव्य बना दिया। सैकड़ों श्रद्धालु आरती में शामिल हुए और मंत्रों की गूंज के साथ वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर प्रांगण में दमदार आलोक व्यवस्था, भजन-कीर्तन और शिव के प्रति असीम श्रद्धा की लहर देखने को मिली। यह दृश्य सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष से भर देने वाला था।

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काशी के स्थानीय बाजारों और गलियों में भी सावन के इस अंतिम सोमवार की रौनक देखते ही बन रही थी। प्रसाद, बेलपत्र, गंगाजल और रुद्राक्ष की दुकानों पर भीड़ लगी रही। काशी के घाटों पर विशेष गंगा आरती का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शाम के समय गंगा के किनारे दीपों की रोशनी और भक्तों की आरती से पूरा वातावरण सजीव और पावन बन गया।

सावन का यह आखिरी सोमवार सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह श्रद्धा, संकल्प और विश्वास का जीवंत उदाहरण था। बाबा विश्वनाथ की नगरी ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि यहां की भक्ति बारिश से नहीं, भाव से भीगती है। अब भक्तगण अगले सावन का इंतजार करेंगे, लेकिन इस सोमवार की स्मृति लंबे समय तक उनके हृदय में बसी रहेगी।

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