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OPEC+ ने बढ़ाया तेल उत्पादन, भारत को राहत मिलने की संभावना कम !

ओपेक प्लस (OPEC+) एक समूह है जिसमें तेल निर्यात करने वाले प्रमुख देशों को शामिल किया गया है। OPEC का मतलब “Organization of the Petroleum Exporting Countries” है, यानी तेल निर्यात करने वाले देशों का संगठन। इस समूह में पहले से 13 देश शामिल हैं, जबकि ओपेक+ में अतिरिक्त 9 प्रमुख तेल उत्पादक देश भी शामिल हैं, जैसे रूस। इसका उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार को संतुलित रखना, कीमतों को नियंत्रित करना और उत्पादन नीति तय करना है।

रूस समेत OPEC+ के 22 सदस्य देशों ने हाल ही में घोषणा की कि वे नवंबर से तेल उत्पादन में 1,37,000 बैरल प्रति दिन (BPD) की मामूली बढ़ोतरी करेंगे। यह कदम वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने और तेल की मांग व आपूर्ति के संतुलन को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।इस बढ़ोतरी का स्तर अक्टूबर में हुई बढ़ोतरी के समान ही है। इसका मतलब है कि समूह अचानक बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं बढ़ा रहा, बल्कि धीरे-धीरे कटौती को कम करने की नीति अपना रहा है। यह रणनीति बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव से बचने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए अपनाई जा रही है

OPEC+ का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि अमेरिकी शेल तेल उत्पादकों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों से बाजार हिस्सेदारी वापस लेना भी है। पिछले कुछ सालों में शेल तेल और अन्य प्रतिस्पर्धी स्रोतों ने वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाई थी, जिससे OPEC+ की हिस्सेदारी पर असर पड़ा।इस बढ़ोतरी के पीछे यह भी कारण है कि वैश्विक मांग में कमी आई है। तेल की अधिक आपूर्ति और कम मांग के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। ओपेक+ का यह कदम बाजार में धीरे-धीरे तेल की मात्रा बढ़ाकर स्थिरता लाने के लिए किया गया है।

भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इस फैसले का भी असर पड़ेगा। भारत अपनी तेल खपत का लगभग 85% से ज्यादा आयात करता है। हालांकि, 1,37,000 BPD की मामूली बढ़ोतरी से भारत के लिए तेल की कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिलने वाली है। फिर भी यह कदम वैश्विक तेल बाजार की दिशा और रणनीति को प्रभावित करेगा।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि OPEC+ एक शक्तिशाली वैश्विक संगठन है जो तेल की उत्पादन नीति और कीमतों को नियंत्रित करता है। हालिया बढ़ोतरी वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखने, प्रतिस्पर्धियों से हिस्सेदारी सुरक्षित करने और आयातक देशों पर अप्रत्यक्ष असर डालने की रणनीति का हिस्सा है। यह संगठन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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