देश की राजनीति इन दिनों चुनाव आयोग को लेकर गरमाई हुई है। विपक्षी दल लगातार आयोग पर निशाना साध रहे हैं और आरोपों की बौछार कर रहे हैं। माहौल इतना गरम हो चुका है कि आयोग को लेकर सियासी बयानबाज़ी चुनावी मुद्दा बन गई है।
राहुल गांधी ने आयोग को सीधे तौर पर कठघरे में खड़ा करते हुए “वोट चोर” का नारा दिया है। इसी नारे के साथ उन्होंने बिहार से अपनी 15 दिन की यात्रा का आगाज़ किया है। उनकी इस यात्रा को विपक्षी राजनीति में नई ऊर्जा और आक्रामक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
इधर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग पर तीखे हमले बोले हैं। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लगातार कई पोस्ट किए और सबूतों के साथ आरोप लगाए कि आयोग निष्पक्ष ढंग से काम नहीं कर रहा है।
अखिलेश यादव ने आयोग से “हकनामा” की मांग तक कर डाली है। उनका कहना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि चुनाव आयोग किस दबाव में काम कर रहा है और क्यों बार-बार उस पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं।
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इन घटनाओं के बाद राजनीति और भी गरमा गई है। विपक्ष एकजुट होकर आयोग पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इन आरोपों को केवल “नाटक” और “राजनीतिक रणनीति” बता रहा है।
ऐसे में आने वाले दिनों में चुनाव आयोग पर विपक्षी दलों के हमले और तेज़ हो सकते हैं। यह विवाद केवल आयोग की विश्वसनीयता ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की पारदर्शिता के सवाल को भी गहराई से छू रहा है।
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