प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। वे अब भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री पद पर बने रहने वाले नेता बन चुके हैं। उन्होंने 4078 दिनों तक देश की सेवा कर इंदिरा गांधी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, जो 4077 दिनों तक प्रधानमंत्री रहीं थीं। मोदी का यह सफर केवल समय का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस निरंतरता, जनसमर्थन और राजनीतिक पकड़ का प्रमाण है, जिसने उन्हें देश की सत्ता के केंद्र में बनाए रखा।
इस ऐतिहासिक मौके पर एक और तथ्य खास है कि नरेंद्र मोदी 1947 के बाद जन्मे पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो गैर-हिंदी भाषी राज्य (गुजरात) से आते हैं और फिर भी पूरे देश में इतनी व्यापक स्वीकार्यता रखते हैं। उनकी नेतृत्व शैली, संप्रेषण की ताकत और निर्णायक फैसले उन्हें एक अलग श्रेणी में रखते हैं। चाहे बात विदेश नीति की हो या आतंरिक सुरक्षा की, मोदी सरकार के कार्यकाल में कई बड़े मोड़ देखे गए हैं, जिनका असर दशकों तक महसूस किया जाएगा।
अब प्रधानमंत्री मोदी से आगे केवल एक ही नाम बचता है – पंडित जवाहरलाल नेहरू, जो 6126 दिनों तक देश के पहले प्रधानमंत्री रहे। अगर नरेंद्र मोदी 2029 तक पद पर बने रहते हैं, तो यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी उनके नाम हो सकता है। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में स्थायित्व और निरंतरता की मिसाल भी बन जाएगी। सवाल अब यह है – क्या मोदी इस मुकाम तक पहुंच पाएंगे?
मोदी सरकार के पिछले वर्षों में कुछ फैसले बेहद ऐतिहासिक और यादगार रहे हैं। धारा 370 की समाप्ति, तीन तलाक पर रोक, राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना, जनधन योजना, स्वच्छ भारत अभियान, और आत्मनिर्भर भारत मिशन जैसे फैसलों ने देश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दिशा को बदल दिया है। कई फैसले विवादों में भी रहे, लेकिन उनके प्रभाव और उद्देश्य को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
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इस लंबे कार्यकाल में नरेंद्र मोदी की पहचान एक सशक्त, निर्णायक और जननेता के रूप में बनी है। उनके भाषणों की शैली, संकटों में उनके हस्तक्षेप, और वैश्विक मंचों पर भारत की स्थिति को जिस तरह से उन्होंने मज़बूत किया, वो उन्हें एक अलग ही कद देता है। खासकर कोविड महामारी के दौरान उनका नेतृत्व, वैक्सीनेशन अभियान और राहत योजनाएं लोगों को लंबे समय तक याद रहेंगी।
अब जब 2024 के चुनाव के बाद मोदी का तीसरा कार्यकाल शुरू हो चुका है, देश की निगाहें इस बात पर हैं कि अगले पांच सालों में वे क्या और नया करेंगे। क्या वह नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे? क्या वह भारत को एक विकसित राष्ट्र की दिशा में निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे? और सबसे अहम –
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