झारखंड की राजनीति इन दिनों मानो उबलते कड़ाही की तरह लगातार गर्म होती जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अचानक दिल्ली दौरे और वहां बीजेपी नेताओं से कथित ‘गुप्त मुलाकात’ की खबरों ने पूरे राजनीतिक माहौल को हिला कर रख दिया है। जैसे ही यह खबर आई, सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक ही सवाल गूंजने लगा क्या झारखंड में सत्ता बदलने की तैयारी शुरू हो गई है? मामला और दिलचस्प तब हुआ जब एक बीजेपी नेता ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी लाइन लिखी, जिसने पूरे राज्य के सियासी तापमान को अचानक तेज कर दिया। लोगों ने पोस्ट को पढ़ते ही अटकलें शुरू कर दीं, और कई नेताओं ने भी इसे हल्के में नहीं लिया।
हेमंत सोरेन का यह दिल्ली दौरा किसी सामान्य मुलाकात जैसा नहीं माना जा रहा। समय भी ऐसा जब झामुमो और महागठबंधन में पहले से सीट शेयरिंग को लेकर मनमुटाव चल रहा है, ऐसे में यह मुलाकात सवालों को और गहरा कर रही है। बिहार चुनाव के दौरान सीटों पर खींचतान ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। कई नेताओं ने उस समय भी कहा था कि अंदरखाने कोई बड़ी असहमति पनप रही है, और अब दिल्ली की यह मुलाकात उस शक को और मजबूत करती दिख रही है।
दिल्ली में हुई इस मुलाकात पर आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से सोशल मीडिया पर कयासबाज़ी हो रही है, उससे यह साफ है कि लोगों के मन में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की उम्मीदें और डर दोनों मौजूद हैं। बीजेपी नेता का पोस्ट इस पूरे मामले में घी का काम कर रहा है। पोस्ट की सिर्फ एक लाइन लोगों के जहन में ऐसी हलचल पैदा कर रही है कि अब हर घर में, हर चाय की दुकान पर, हर बहस में सिर्फ इसी “गुप्त मुलाकात” का ज़िक्र है। राजनीतिक विश्लेषक भी इसे यूं ही नहीं जाने दे रहे, उनके मुताबिक झारखंड में कोई बड़ा खेल शुरू हो चुका है जिसकी बारीकियां धीरे-धीरे सामने आएंगी।
महागठबंधन में अंदरूनी खटास कोई छिपी बात नहीं रही। कई बार विवाद सार्वजनिक हुआ है, कई बार नेताओं ने इशारों में अपनी नाराज़गी जताई है। सीट शेयरिंग की लड़ाई ने रिश्तों को और कमजोर किया, और अब जब हेमंत सोरेन के बीजेपी नेताओं से मिलने की चर्चा सामने आई है, तो गठबंधन के भीतर बेचैनी और बढ़ गई है। कुछ लोग इसे ‘सियासी रणनीति’ कहते हैं, तो कुछ इसे ‘नई डील’ की शुरुआत मान रहे हैं।
झारखंड की राजनीति में पहले भी अचानक हुए सत्ता परिवर्तन ने सबको चौंकाया है, इसलिए इस बार भी लोग किसी भी संभावना को नकार नहीं रहे। विपक्ष भी इस मौके को छोड़ने के मूड में नहीं है, वह हर छोटे इशारे को बड़ा मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रहा है। वहीं, सत्ता पक्ष की चुप्पी और ज्यादा सवाल उठा रही है। जितनी चुप्पी, उतने ही बड़े अंदाज़े यह सूत्र अब झारखंड की राजनीति पर बिल्कुल फिट बैठ रहा है।
दूसरी तरफ जनता का नजरिया साफ है। उन्हें लगता है कि अगर मुख्यमंत्री विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं तो कोई न कोई बड़ी बात जरूर है। चाहे वह रणनीतिक कदम हो, दबाव बनाने का तरीका हो, या गठबंधन की नाराज़गी का असर कहानी में कहीं न कहीं कोई ट्विस्ट जरूर छिपा है। लोग यह भी कह रहे हैं कि बिहार चुनाव में हुए झगड़े की वजह शायद अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है और इसका झारखंड की सत्ता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
हालात ऐसे हैं कि हर दिन नई थ्योरी सामने आ रही है। कोई कहता है कि गठबंधन टूटने वाला है, कोई कहता है कि यह महज अफवाह है, और कुछ लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि झारखंड में ‘सियासी पुनर्गठन’ की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन सच क्या है, यह अभी परदा उठा नहीं है। जो भी है, इस सस्पेंस ने पूरे राज्य का राजनीतिक माहौल हाई-वोल्टेज कर दिया है।
अब सबकी निगाहें सिर्फ एक दिशा में टिकी हैं आने वाले दिनों में क्या होगा? क्या सच में कोई बड़ा गेम शुरू हो चुका है या यह सिर्फ राजनीतिक शतरंज की चाल है? झारखंड इस समय इंतजार में है, और इस इंतजार के बीच हवा में सिर्फ एक ही वाक्य तैर रहा है “कुछ तो बड़ा होने वाला है!”
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