केरल के खूबसूरत पहाड़ी शहर मुन्नार में इस बार पंचायत चुनाव सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि नाम और पहचान का अनोखा संगम बन गए हैं। वजह है बीजेपी की उम्मीदवार सोनिया गांधी, जिनका नाम सुनकर हर किसी की भौंहें उठ जाती हैं। पहले तो लोग हैरान हो जाते हैं, फिर जब सच्चाई पता चलती है तो बात पूरे इलाके में हंसी और चर्चा का विषय बन जाती है। यह सोनिया गांधी दिल्ली वाली नहीं, बल्कि मुन्नार की 34 साल की आम मगर बेहद दिलचस्प महिला हैं, जो नल्लाथन्नी के 16वें वार्ड से बीजेपी के टिकट पर मैदान में उतरी हैं। उनके पिता कट्टर कांग्रेसी थे और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी बेटी का नाम सोनिया गांधी रख दिया था, लेकिन किस्मत के पलटवार देखिए आज वही सोनिया बीजेपी की उम्मीदवार बनकर सुर्खियों में हैं।
मुन्नार के इस छोटे से वार्ड में चुनावी माहौल वैसा ही है जैसा किसी मसालेदार कहानी में ट्विस्ट आता है। गाँव की गलियों में जब लोग सुनते हैं कि “सोनिया गांधी बीजेपी से खड़ी हो गई हैं”, तो लोग पहले तो ठठाकर हँस पड़ते हैं, फिर पूरे मामले को समझने के लिए जुट जाते हैं। खुद सोनिया भी मानती हैं कि उनका नाम ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है और इस चुनाव में वही नाम उनकी सबसे बड़ी चर्चा भी बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि उनका पूरा परिवार अभी तक कांग्रेस समर्थक माना जाता है, लेकिन पति सुभाष की राजनीतिक आस्था बीजेपी में है। धीरे-धीरे पति के साथ जुड़ाव बढ़ा और अब सोनिया खुद बीजेपी का चेहरा बन चुकी हैं।
मुन्नार में लोग इस चुनाव को मज़ाक में ‘नाम बनाम दल’ की लड़ाई बता रहे हैं। कांग्रेस के समर्थकों के बीच हल्की-फुल्की तकरार होती है कि “अपनी सोनिया तो अब बीजेपी वाली हो गई!”, वहीं भाजपा के समर्थकों को यह एक मज़ेदार अवसर लग रहा है कि अब उनके पास ऐसा नाम है जिसे सुनकर ही लोगों का ध्यान खिंच जाता है। चुनाव प्रचार के दौरान सोनिया गांधी का नाम हर घर की दीवार और हर मोहल्ले की हवा में गूंज रहा है। कहीं लोग हंसते हुए पूछते हैं कि “कांग्रेस वाली सोनिया?”, तो कहीं उत्सुकता से लोग कहते हैं “सुनो सुनो, बीजेपी की सोनिया आई हैं!”
पूरा परिवार भी इस चर्चा का हिस्सा है। पिता, जिनकी प्रेरणा से यह नाम मिला, आज हालात देखकर मुस्करा भर देते हैं, जबकि आसपास के लोग इसे एक दिलचस्प किस्सा बनाकर सुनाते हैं। वार्ड के मतदाता भी इसी कारण ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि यह चुनाव सिर्फ काम और वादों का नहीं, बल्कि नाम की वजह से भी सुर्खियों में है। हर सभा, हर पोस्टर, हर बातचीत में एक ही नाम सबसे ऊँची आवाज़ में गूंज रहा है सोनिया गांधी। लेकिन इस बार कहानी उलट है, मंच बीजेपी का है और उम्मीदवार वही सोनिया।
मुन्नार का यह चुनाव दिखा रहा है कि लोकतंत्र में दिलचस्पी पैदा करने के लिए कभी-कभी एक नाम ही काफी होता है। सोनिया की उम्मीदवारी न सिर्फ राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी है, बल्कि यह भी दिखा रही है कि किस तरह एक नाम अलग-अलग परिस्थितियों में बिल्कुल अलग मायने ले सकता है। स्थानीय लोग कहते हैं कि इस बार “नाम कांग्रेस का, वोट बीजेपी का” वाला अनूठा माहौल चुनाव को और भी मजेदार बना रहा है।
अब नतीजा चाहे जो भी निकले, एक बात तो तय है मुन्नार का यह किस्सा आने वाले कई चुनावों तक याद रखा जाएगा। और लोग हमेशा मुस्कराते हुए कहेंगे: सोनिया गांधी… लेकिन ये वाली BJP की!
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
