back to top
Wednesday, June 10, 2026
36.4 C
Lucknow
HomeUncategorizedआवारा कुत्तों का आतंक! इंदौर से लखनऊ तक बढ़ते डॉग बाइट मामलों...

आवारा कुत्तों का आतंक! इंदौर से लखनऊ तक बढ़ते डॉग बाइट मामलों ने बढ़ाई चिंता, बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित |

देश के कई शहरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है। हाल के दिनों में मध्य प्रदेश के इंदौर और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आए आंकड़ों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। सड़कों, बाजारों, अस्पतालों और रिहायशी इलाकों में डॉग बाइट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम नागरिकों में भय का माहौल बन गया है।

इंदौर में स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। जून के पहले पांच दिनों में ही 961 लोगों को कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए हैं। सबसे हैरान करने वाली घटना सांवेर रोड क्षेत्र से सामने आई, जहां एक ही आवारा कुत्ते ने 24 घंटे के भीतर 42 लोगों को घायल कर दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोगों ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

घायलों में केवल राहगीर ही नहीं, बल्कि अस्पताल स्टाफ, मरीज, छात्र और स्थानीय निवासी भी शामिल बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब बच्चों को अकेले बाहर भेजना मुश्किल हो गया है और कई इलाकों में लोग सुबह-शाम टहलने से भी बचने लगे हैं। उनका आरोप है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, लखनऊ में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है। यहां हर दिन 200 से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन मुफ्त उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। डॉक्टरों के अनुसार, हर दिन बड़ी संख्या में नए मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

Balrampur Hospital में रोजाना 60 से 70 नए डॉग बाइट मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि कुल मिलाकर 250 से 300 लोग एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं। यह आंकड़ा इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पीड़ितों में लगभग 30 प्रतिशत बच्चे हैं।

पुराने लखनऊ के कई इलाकों से सबसे अधिक मामले सामने आने की बात कही जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मोहल्लों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते हैं और कई बार लोगों का पीछा भी करते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या का समाधान केवल डॉग बाइट के बाद इलाज उपलब्ध कराने से नहीं होगा। इसके लिए आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण, कचरा प्रबंधन और पशु नियंत्रण से जुड़े दीर्घकालिक उपायों पर भी गंभीरता से काम करना होगा। कई शहरों में ऐसी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन बढ़ते मामलों से लगता है कि उनकी प्रभावशीलता पर अभी और काम करने की जरूरत है।

डॉग बाइट सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी प्रबंधन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। जब बच्चों, मरीजों और आम नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होने लगे, तो यह प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। फिलहाल इंदौर और लखनऊ के आंकड़े यही संकेत दे रहे हैं कि इस चुनौती से निपटने के लिए अधिक प्रभावी और त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।

written by:- Anjali Mishra

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Livenewsx
Livenewsxhttp://www.livenewsx.in
we are digtal news platform.we are covering social facts politics national international news breaking
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments