बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता सुनील शेट्टी ने हाल ही में सिनेमा में इतिहास को प्रस्तुत करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फिल्मों में बार-बार केवल कुछ चुनिंदा शासकों और व्यक्तित्वों को ही दिखाया जाता है, जबकि भारत की समृद्ध संस्कृति, प्राचीन वेद, और महान योद्धाओं को वह जगह नहीं मिलती जिसके वे वास्तव में हकदार हैं।
सुनील शेट्टी ने स्पष्ट किया कि बॉलीवुड में अकबर, बाबर, औरंगजेब जैसे शासकों पर कई फिल्में बन चुकी हैं और ये किरदार दर्शकों के लिए आकर्षक बने हुए हैं। वहीं, छत्रपति शिवाजी महाराज, राजपूत राजाओं, और भारत के प्राचीन स्वतंत्रता सेनानियों पर कम फिल्में या वेब कंटेंट निर्मित हुए हैं। यह स्थिति भारतीय सिनेमा में इतिहास की एकतरफा प्रस्तुति को दर्शाती है।
उनका यह भी मानना है कि इतिहास केवल सत्ता और शासकों की कहानी नहीं है। इतिहास में संस्कृति, परंपरा, बलिदान और राष्ट्रभक्ति का भी महत्वपूर्ण स्थान है, जिसे सिनेमा में अधिक दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए सही और प्रेरणादायक इतिहास प्रस्तुत करना जरूरी है, ताकि वे अपने राष्ट्र और संस्कृति से जुड़ाव महसूस कर सकें।
सुनील शेट्टी ने यह बात भी उठाई कि बॉलीवुड में प्रायः नाटकीय और वाणिज्यिक दृष्टिकोण के कारण भी इतिहास के सटीक और प्रेरक पहलुओं को नजरअंदाज किया जाता है। फिल्म निर्माता अक्सर व्यक्तित्व की राजनीति और संवेदनशील घटनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि हमारे महान योद्धाओं और सांस्कृतिक प्रतीकों की गाथाएं कम दिखाई जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता है। सिनेमा को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहकर शिक्षा और प्रेरणा का भी साधन बनाना चाहिए। इतिहास पर आधारित फिल्में और वेब सीरीज युवाओं को देशभक्ति और संस्कृति के मूल्यों से जोड़ सकती हैं।
सुनील शेट्टी की यह अपील फिल्मकारों और स्क्रिप्ट राइटर्स के लिए चुनौती भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास की गाथाओं और महान व्यक्तित्वों को सिनेमा में उतारना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दर्शकों के प्रति सत्य और सम्मान भी है।
इस मुद्दे पर चर्चा तेजी से सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी हो रही है। दर्शक अब ऐसे कंटेंट की मांग कर रहे हैं जो देशभक्ति, संस्कृति और प्रेरक इतिहास को प्रदर्शित करे। बॉलीवुड में इस दिशा में कदम उठाने की जरूरत है ताकि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम न रहे, बल्कि शिक्षा, जागरूकता और प्रेरणा का स्रोत बने।
कुल मिलाकर, सुनील शेट्टी का बयान यह याद दिलाता है कि हमारा इतिहास केवल शासकों की शक्ति की कहानी नहीं, बल्कि बलिदान, संस्कृति और गौरव की कहानी है। इसे सही तरीके से सिनेमा में दिखाना जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव महसूस कर सके।
written by :- Anjali Mishra
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
