ललितपुर में एक जनसभा के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर तीखा हमला बोला, जिससे उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। अपनी बिंदास और विवादित शैली के लिए मशहूर मौर्य ने इस बार हिंदू राष्ट्र, मतदाता सूची संशोधन अभियान (SIR), और रामचरित मानस पर अपनी पुरानी टिप्पणी को दोबारा दोहराते हुए माहौल को काफी तेज़ कर दिया। उनके इस भाषण ने राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में नई बहस को जन्म दे दिया है।
मौर्य ने सबसे पहले हिंदू राष्ट्र की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर हिंदू राष्ट्र की मांग करना ठीक माना जा रहा है, तो फिर बौद्ध, सिख या मुस्लिम राष्ट्र की मांग को गलत कैसे ठहराया जा सकता है? उन्होंने यह तर्क देकर संविधान के सेकुलर ढांचे पर ज़ोर दिया और यह संकेत दिया कि धर्म आधारित राष्ट्र की अवधारणा भारत को विभाजित कर सकती है। उनका कहना था कि इस तरह की मांगें देश के बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक स्वरूप के खिलाफ हैं।
उन्होंने आगे बढ़ते हुए कहा कि “हिंदू राष्ट्र की मांग करने वालों पर देशद्रोह लगना चाहिए।” यह बयान सीधे तौर पर उन समूहों पर हमला था जो भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर रहे हैं। मौर्य का आरोप है कि ऐसे नारे समाज में विभाजन पैदा करते हैं, और सरकार इन्हें रोकने के बजाय अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे रही है। विपक्षी दलों ने उनके इस बयान का स्वागत किया, जबकि सत्ताधारी दल ने इसे राजनीतिक नाटक बताया।
SIR (Special Intensive Revision of Voters List) अभियान पर भी मौर्य ने बड़ा सवाल उठाया। उनका दावा है कि यह अभियान मतदाताओं को वोट देने से दूर करने की चाल है। उनके अनुसार, कई लोगों के नाम काटे जा रहे हैं या फॉर्म भरने की जटिलता के कारण गरीब और अनपढ़ मतदाता खुद ही प्रक्रिया से बाहर हो जा रहे हैं। मौर्य का कहना है कि “बिहार में NDA की सरकार इसी वजह से बनी,” क्योंकि वहां मतदाताओं की संख्या में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी। यह आरोप चुनाव आयोग जैसे संस्थान की निष्पक्षता पर सीधी चोट है।
अपने विवादित रुख के लिए मशहूर मौर्य ने रामचरित मानस पर भी अपनी पुरानी टिप्पणी दोहराई। उन्होंने कहा, “रामचरित मानस में जो लिखा है, मैं नहीं मानता।” इस बयान ने एक बार फिर हिंदू संगठनों और सत्ताधारी दल के समर्थकों में नाराज़गी पैदा कर दी है। रामचरित मानस पर उनकी आपत्तियों को पहले भी सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला बताया गया था, और अब इसे दोहराने से आने वाले समय में फिर से बवाल होना तय है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य विपक्षी राजनीति में अपने लिए एक अलग स्पेस बनाना चाहते हैं ऐसा स्पेस जो बहुजन, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के बीच तेज़ी से गूंज पैदा कर सके। उनके बयानों में एक तरफ तीखा तेवर है, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष को सीधे चुनौती भी। यही वजह है कि उनके हर बयान पर राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ जाती है।
कुल मिलाकर, ललितपुर में दिया गया मौर्य का भाषण आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहस और टकराव दोनों को बढ़ाने वाला है। हिंदू राष्ट्र, SIR अभियान और रामचरित मानस पर एक साथ हमला करके उन्होंने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सत्ता पक्ष, विपक्ष और जनता इन बयानों पर कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मुद्दे 2027 के चुनावी विमर्श का हिस्सा बनते हैं या नहीं।
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