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शहीद के सम्मान के बीच फंसी फिल्म अब CBFC की परख तय करेगी रिलीज का रास्ता!

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर सोमवार, 1 दिसंबर को एक अहम निर्देश जारी किया, जिसने पूरे मुद्दे को नई दिशा दे दी। कोर्ट ने CBFC यानी फिल्म सेंसर बोर्ड से साफ कहा है कि फिल्म को सर्टिफिकेट जारी करते समय शहीद मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए। यह वही परिवार है जिसने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग उठाई थी, क्योंकि उनका दावा है कि फिल्म में मेजर मोहित शर्मा से जुड़े कुछ पहलुओं को गलत तरीके से पेश किया गया है। हालांकि कोर्ट ने उनकी याचिका को फिलहाल बंद कर दिया, लेकिन CBFC को दिया गया यह निर्देश अपने आप में फिल्म की पूरी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को संवेदनशील और ज़िम्मेदार बनाने का संकेत देता है।

रणवीर सिंह की मल्टीस्टारर फिल्म ‘धुरंधर’ 5 दिसंबर को रिलीज होने वाली है और इसके ट्रेलर आने के बाद से ही यह विवादों के घेरे में आ गई। मेजर मोहित शर्मा जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया उनसे जुड़ी किसी भी बात पर देश के लोग स्वाभाविक रूप से भावुक और संवेदनशील हो जाते हैं। ऐसे में उनके परिवार द्वारा उठाई गई आपत्तियों को कोर्ट द्वारा गंभीरता से लेना इस बात की याद दिलाता है कि शहीदों के सम्मान को लेकर देश में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट का यह रवैया स्पष्ट करता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शहीदों की गरिमा दोनों का सम्मान किया जाना ज़रूरी है।

फिल्म ‘धुरंधर’ पर विवाद बढ़ते ही यह सिर्फ एक सिनेमाई मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि एक भावनात्मक और नैतिक बहस का हिस्सा बन गया। जनता का एक बड़ा वर्ग फिल्म निर्माताओं से उम्मीद करता है कि वास्तविक जीवन के नायकों को दिखाते समय पूरी सावधानी बरती जाए, ताकि उनके बलिदान की गरिमा को ठेस न पहुंचे। यही वजह है कि हाईकोर्ट का यह फैसला एक तरह से कला की स्वतंत्रता और संवेदनशील विषयों के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश भी माना जा रहा है।

CBFC के लिए यह निर्देश किसी जिम्मेदारी से कम नहीं। सेंसर बोर्ड को अब फिल्म की सामग्री को उन मानकों पर परखना होगा जो न सिर्फ कानून और सेंसरशिप के नियमों पर आधारित हैं, बल्कि नैतिक संवेदनशीलता और शहीद परिवारों की भावनाओं को भी महत्वपूर्ण स्थान देते हैं। यह कदम फिल्म इंडस्ट्री में भी एक मैसेज देता है कि सच्ची घटनाओं और वास्तविक नायकों पर आधारित फिल्में बनाते समय सतर्कता और सटीकता बेहद ज़रूरी है।

कोर्ट का यह निर्णय फिल्म पर लगे विवाद को शांत करने की दिशा में एक शुरुआती प्रयास भी माना जा रहा है। याचिका को बंद कर दिया जाना ऐसा संकेत देता है कि अदालत फिल्म रिलीज के रास्ते में अवरोध नहीं डालना चाहती, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी शहीद के परिवार की आस्था और मान-सम्मान को चोट न पहुँचे। अब पूरा मामला CBFC के हाथ में है, और उसकी जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है।

इसी विवाद ने फिल्म ‘धुरंधर’ को रिलीज से पहले ही सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया है। दर्शक भी अब यह देखने को उत्सुक हैं कि फिल्म किस तरह वास्तविक घटनाओं और व्यक्तित्वों को प्रस्तुत करती है, और क्या वह उन सीमाओं का सम्मान करती है, जिन्हें पार नहीं किया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में CBFC का फैसला और फिल्म की रिलीज दोनों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा, देशभक्ति और शहीदों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर हर बार देश एकजुट होकर खड़ा होता है। और यही वजह है कि यह विवाद केवल एक फिल्म का मामला नहीं, बल्कि उन मूल्यों का सवाल बन गया है जिन पर देश की नींव टिकती है।

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