लोक निर्माण विभाग यानी PWD — नाम जितना गूंजता है, काम उतना ही अक्सर संदेह के घेरे में होता है। राजधानी लखनऊ से निकलकर अब रामपुर और मुरादाबाद जैसे जिलों में भी सड़कों की खस्ताहाली और टेंडरों की बंदरबांट को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हमारे डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘लॉइव न्यूज़ एक्स’ ने इस मुद्दे को ज़ोरदार तरीके से उठाया, और अब इसका असर ज़मीन पर साफ दिख रहा है।
रामपुर: जब ठेकेदारी बन जाए ‘पारिवारिक प्राथमिकता’
रामपुर में अधिशासी अभियंता कृष्ण वीर सिंह पर लगे आरोप सीधे विभागीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। सूत्रों के अनुसार, ठेकों का वितरण एक ‘निजी समाजवादी मॉडल’ के तहत उन्हीं चेहरों को दिया जा रहा है जो किसी ना किसी रूप में अभियंता के करीबी माने जाते हैं।
‘लॉइव न्यूज़ एक्स’ की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी रामपुर ने तत्परता दिखाते हुए C.D.O. की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की है और टेंडरों से संबंधित सभी फाइलें तलब कर ली गई हैं। यह कार्रवाई एक स्पष्ट संकेत है कि मीडिया की जवाबदेही और सटीक रिपोर्टिंग कैसे ज़मीनी असर डाल सकती है।
मुरादाबाद: जब ईमानदारी हो जाए ‘नजरबंद’
दूसरी ओर मुरादाबाद की कहानी कुछ और ही बयां करती है। यहां अधिशासी अभियंता कुलदीप संत ने विभागीय भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए ऑफिस में लगाए सीसीटीवी कैमरे, ताकि कामकाज में पारदर्शिता लाई जा सके। लेकिन पारदर्शिता उन चेहरों को रास नहीं आई जो अंधेरे में खेल खेलने के आदी थे।
नतीजा? धरने, विरोध और संत जी के खिलाफ झूठे आरोप। मगर विभागीय सूत्र बताते हैं कि संत एक बेहद ईमानदार अधिकारी हैं – और यही ईमानदारी उन्हें भ्रष्टाचारियों की नजर में खटकने लगी।
मीडिया की भूमिका: जब ‘डिजिटल आवाज़’ बने बदलाव का ज़रिया
‘लॉइव न्यूज़ एक्स’ ने इन दोनों घटनाओं की निष्पक्ष और गहन रिपोर्टिंग की, जिसने न सिर्फ जनता को सच्चाई से रूबरू कराया, बल्कि प्रशासन को भी मजबूर किया कि वह एक्शन ले। रामपुर में घोटाले की जांच शुरू होना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
यह स्टोरी बताती है कि जब मीडिया केवल खबर नहीं, बल्कि सच के साथ खड़ी होती है, तब व्यवस्था को भी अपने रास्ते बदलने पड़ते हैं।
