लखनऊ समेत पूरे उत्तर प्रदेश में 18 फरवरी से बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत होने जा रही है, और इस बार सरकार व शिक्षा विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां कर ली हैं, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी, नकल या अव्यवस्था की गुंजाइश न रहे। लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को लेकर पूरे प्रदेश में खास सतर्कता बरती जा रही है।
हर जिले में विशेष कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां से सभी परीक्षा केंद्रों की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, ताकि नकल माफिया या किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके। जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और पुलिस के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केंद्रों तक बसों का संचालन सुचारु रूप से जारी रहेगा। परिवहन विभाग को साफ निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा के दिनों में छात्रों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले परीक्षार्थियों के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जाएंगे, ताकि वे समय पर केंद्र तक पहुंच सकें।
परीक्षा के दौरान शांति बनाए रखने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों के आसपास लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह रोक रहेगी, जिससे छात्रों का ध्यान भंग न हो। इसके साथ ही केंद्रों के पास मौजूद फोटोकॉपी और साइबर कैफे जैसी दुकानों को परीक्षा अवधि में बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रश्नपत्रों की नकल या किसी तरह की छेड़छाड़ की संभावना खत्म की जा सके।
सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और पेपर लीक जैसी खबरों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। प्रशासन ने इसके लिए क्विक रिस्पांस टीम का गठन किया है, जो फर्जी पोस्ट, भ्रामक मैसेज या अफवाह फैलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई करेगी। साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके।
संवेदनशील और अति संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। यहां न सिर्फ पुलिस की मौजूदगी रहेगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण भी किया जाएगा। प्रशासन का फोकस उन केंद्रों पर ज्यादा रहेगा, जहां पहले नकल या गड़बड़ी की शिकायतें मिलती रही हैं।
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। स्ट्रांग रूम की रात में अचानक जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रश्नपत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि इन सभी कदमों का मकसद छात्रों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें निष्पक्ष और शांत माहौल में परीक्षा देने का मौका देना है। प्रशासन चाहता है कि मेहनती छात्रों को उनका हक मिले और नकल या गड़बड़ी करने वालों के लिए कोई जगह न बचे।
कुल मिलाकर, यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 इस बार सिर्फ एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रशासनिक सख्ती, तकनीकी निगरानी और छात्र सुविधा का बड़ा उदाहरण बनने जा रही है, जहां सरकार का साफ संदेश है—परीक्षा होगी, लेकिन पूरी पारदर्शिता और अनुशासन के साथ।
written by :- Anjali Mishra
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