अमेरिका की नई सोशल मीडिया वेरिफिकेशन पॉलिसी लागू होते ही भारत में H-1B और H-4 वीज़ा आवेदकों के इंटरव्यू में बड़ी संख्या में रद्दीकरण और शेड्यूलिंग की स्थिति पैदा हो गई है। 15 दिसंबर 2025 से H-1B वीज़ा आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की अनिवार्य जांच शुरू कर दी गई, जिसके बाद कई आवेदकों को अतिरिक्त बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के लिए भेजा गया। अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया कि यह री-शेड्यूलिंग सिस्टम अपडेट की वजह से हुई है, जिससे आवेदकों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
इस नई पॉलिसी के तहत हर आवेदक के सोशल मीडिया प्रोफाइल का मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि उनकी ऑनलाइन गतिविधियों और नेटवर्क की जांच की जा सके। खासकर पिछले पांच सालों की पोस्ट और इंटरैक्शन पर ध्यान दिया जाएगा। इस कदम का मकसद अमेरिकी इमिग्रेशन सुरक्षा को बढ़ाना बताया जा रहा है, लेकिन इसके असर से भारत में H-1B और H-4 वीज़ा अप्लायर्स के बीच चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
अमेरिका की इस कड़ी नीति के बावजूद, भारतीय टेक पेशेवरों के लिए अमेरिकी कंपनियों में अवसर कम नहीं हुए हैं। जुलाई 2025 में ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी’ कहने की बात कही थी, लेकिन अब हालात उलट गए हैं। भारत में अमेरिकी कंपनियों का निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला है।
माइक्रोसॉफ्ट एशिया का सबसे बड़ा निवेश भारत में करने की तैयारी में है, जबकि अमेज़न ने भारत में 35 अरब डॉलर निवेश का ऐलान किया। इसके अलावा कई अन्य अमेरिकी कंपनियां भी भारत को सुरक्षित और बड़े मार्केट के रूप में देखकर भारी निवेश कर रही हैं। यह संकेत देता है कि भारतीय टेक और इनोवेशन सेक्टर अब ग्लोबल निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक हब बन चुका है।
अमेरिका की नई सोशल मीडिया पॉलिसी और वीज़ा जांच के कारण भारतीय आवेदकों में असमंजस और चिंता बढ़ी है। कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या इंटरव्यू में देरी या दोबारा शेड्यूलिंग उनके करियर को प्रभावित करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अस्थायी प्रक्रिया है, और केवल सुरक्षा मानकों को मजबूत करने का प्रयास है।
हालांकि, विपक्ष ने ट्रंप की टैरिफ नीति पर कड़ा वार किया है। उनका कहना है कि अमेरिका की यह नीति भारत–अमेरिका रिश्तों में खटास डाल रही है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि ट्रंप “नोबेल पुरस्कार न जीत पाने के गुस्से को भारत पर निकाल रहे हैं।” इससे पहले अमेरिका–भारत रिश्तों में तनाव और चिंतन के संकेत मिले थे, लेकिन अब निवेश के नए अवसर इसे संतुलित कर रहे हैं।
अमेरिकी संसद में भी इस मामले पर चर्चा हुई। सांसद सिडनी कैमलेगर-डव ने कहा कि मोदी और पुतिन की हालिया तस्वीर और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों से स्पष्ट है कि अमेरिका की दबाव वाली नीति भारत को रूस के और करीब धकेल रही है। उनके अनुसार, अमेरिका को भारत के आर्थिक और रणनीतिक फैसलों में हस्तक्षेप करने की बजाय सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
वहीं भारतीय टेक कंपनियों और पेशेवरों के लिए स्थिति अब भी सुनियोजित और अवसरों से भरी हुई है। अमेरिकी निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, इंडस्ट्रीज को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय बाजार ग्लोबल इकोनॉमी में अपनी मजबूती दिखाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि अमेरिका की नई सोशल मीडिया वेरिफिकेशन पॉलिसी और H-1B वीज़ा जांच के बीच, भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। पॉलिसी की अस्थायी असुविधा के बावजूद दीर्घकालीन निवेश और आर्थिक अवसर भारतीय युवाओं और कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
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