अयोध्या धाम में बरसती फुहारों के बीच भक्ति, आस्था और समर्पण का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने हर किसी का हृदय भावविभोर कर दिया। मध्यरात्रि के बाद जैसे ही बहुप्रतीक्षित 14 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ हुआ, पूरा अयोध्या नगरी “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठी। लगभग 50 किलोमीटर लंबी इस पवित्र परिक्रमा में लाखों श्रद्धालु शामिल हुए, जो प्रभु श्रीराम के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करने के लिए दूर-दूर से पहुंचे थे। यह यात्रा सामान्य रूप से 8 से 10 घंटे तक चलती है, और हर पड़ाव पर भक्तों का उत्साह और भक्ति का ज्वार देखते ही बनता है।
इस बार की परिक्रमा में मौसम ने भले ही चुनौती दी, लेकिन श्रद्धा ने हर कठिनाई को मात दे दी। लगातार हो रही बारिश के कारण कई स्थानों पर रास्ते धंस गए, कीचड़ और जलभराव ने मुश्किलें बढ़ा दीं—फिर भी भक्तों के कदम नहीं रुके। इसी बीच सेतु निगम के एमडी डी.बी. सिंह और उनकी टीम ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए रातभर सड़कों की मरम्मत का कार्य जारी रखा, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा बाधित न हो। उनकी समर्पण भावना ने प्रशासनिक दक्षता और सेवा भावना की मिसाल कायम कर दी।
रात के अंधेरे और बारिश की बूंदों के बीच जब दीपक जल उठे, शंखनाद गूंजा और “राम नाम” का स्वर आकाश में लहराया, तो अयोध्या धाम का हर कोना मानो दिव्यता से आलोकित हो उठा। भक्तों की आंखों में आनंदाश्रु थे, होंठों पर राम का नाम और मन में उस धाम की अनुभूति—जहाँ स्वयं भगवान श्रीराम ने कदम रखे थे। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति की वह गंगा थी जिसमें हर आस्तिक ने डुबकी लगाई।
बरसती बूंदों में जब भक्तों ने परिक्रमा की राह तय की, तो वह दृश्य मानो धरती पर उतर आए स्वर्ग जैसा था—जहाँ हर कण में भक्ति थी, हर सांस में विश्वास और हर कदम में राम का नाम। अयोध्या ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि श्रद्धा जब अटल होती है, तो प्रकृति भी उसकी सेवा में तत्पर हो जाती है।
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