एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के पांचवें टेस्ट में युवा बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल ने एक बार फिर खुद को साबित करते हुए शानदार शतक ठोंका। यह उनके टेस्ट करियर का छठा शतक है, जो बताता है कि यह युवा खिलाड़ी अब अनुभव की उस पिच पर उतर चुका है, जहां वह न केवल टिकता है, बल्कि टीम के लिए मैच बदलने वाली पारियां भी खेलता है।
तीसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद मीडिया से बातचीत में यशस्वी ने अपने शतक के पीछे की एक खास कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि जब वे बल्लेबाज़ी कर रहे थे, तब अचानक उन्होंने स्टैंड्स में कप्तान रोहित शर्मा को देखा। उसी पल रोहित ने इशारे में कहा – “खेलते रहना!” यशस्वी के मुताबिक, यह इशारा उनके लिए एक भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण था।
यशस्वी ने कहा, “जब मैंने रोहित भाई को देखा और उनका इशारा मिला, तो मुझे लगा कि मैं और बेहतर कर सकता हूं। मुझे उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ओपनिंग पार्टनर के तौर पर रोहित शर्मा से उन्हें शुरुआत से ही बहुत कुछ सीखने को मिला है – चाहे वह तकनीक हो, मानसिकता या मैदान पर शांत रहना।
इस मैच में जायसवाल की पारी ने भारत की स्थिति को मजबूत कर दिया है। जहां पिच बल्लेबाज़ों के लिए आसान नहीं रही, वहीं यशस्वी ने धैर्य और आक्रामकता का संतुलन बखूबी बनाया। उनका यह शतक न सिर्फ टीम को बढ़त दिलाने में मददगार रहा, बल्कि उनकी मेंटल टफनेस और मैच की परिस्थितियों को पढ़ने की क्षमता का भी प्रमाण बन गया।
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यशस्वी के इस बयान से यह भी साफ होता है कि भारतीय ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों के बीच आपसी सम्मान और सपोर्ट का माहौल कितना मजबूत है। सीनियर खिलाड़ी जैसे रोहित शर्मा का एक इशारा भी युवा खिलाड़ियों को मैदान पर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास दे सकता है।
भारत के लिए यह टेस्ट मैच जितना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, उतना ही आने वाले टेस्ट सितारों के उभार की कहानी भी बन रहा है। और उस कहानी के केंद्र में फिलहाल एक नाम है — यशस्वी जायसवाल।
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