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“फूलों की छांव में विराजे बिहारी जी: वृंदावन में आरंभ हुआ तीन माह का फूल बंगला महोत्सव”

धर्म, भक्ति और परंपरा की धरती वृंदावन में मंगलवार को ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में फूल बंगला महोत्सव का शुभारंभ हुआ। अब ठाकुरजी आगामी साढ़े तीन माह तक रंग-बिरंगे फूलों से सजे भव्य बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

धर्म, भक्ति और परंपरा की धरती वृंदावन में मंगलवार को ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में फूल बंगला महोत्सव का शुभारंभ हुआ। अब ठाकुरजी आगामी साढ़े तीन माह तक रंग-बिरंगे फूलों से सजे भव्य बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।हर वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी से लेकर श्रावण कृष्ण पक्ष की हरियाली अमावस्या तक यह महोत्सव मनाया जाता है। यह पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं, भक्ति और सौंदर्य का अद्भुत संगम है।

बांकेबिहारी जी का आध्यात्मिक इतिहास

ठाकुर बांकेबिहारी जी को स्वयं श्रीकृष्ण का विशेष स्वरूप माना जाता है, जो राधा रानी के साथ नित्य विहार करते हैं। मान्यता है कि 1864 में स्वामी हरिदास जी ने अपनी तपस्या और भक्ति से इस दिव्य स्वरूप को प्रकट किया था। भक्तों का मानना है कि ठाकुरजी स्वयं वृंदावन में वास करते हैं, और उनके दर्शन मात्र से ही जन्मों-जन्मों के पाप कट जाते हैं।

यहाँ दर्शन की विशेष परंपरा है—लगातार नेत्र मिलन नहीं किया जाता, बल्कि बीच-बीच में पर्दा डाला जाता है, जिससे भक्तों के मन में प्रेम और दर्शन की लालसा बनी रहे।

महोत्सव की महिमा

फूल बंगला महोत्सव का उद्देश्य केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि प्राकृतिक फूलों से ठाकुरजी को गर्मी से राहत देना भी है। भक्तजन देशी-विदेशी फूलों से अलंकृत बंगला सजाते हैं—जिसमें गुलाब, रजनीगंधा, गेंदा, ऑर्किड आदि का प्रयोग होता है।

मंगलवार को जब ठाकुरजी फूलों के बंगले में विराजे, तो उनकी मनोहारी छवि ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरे मंदिर परिसर में “जय बांके बिहारी लाल की!” के जयकारों से आकाश गूंज उठा।

भक्ति का केंद्र बना वृंदावन

वृंदावन सदा से ही राधा-कृष्ण लीला भूमि रहा है, और बांकेबिहारी मंदिर इस भूमि का हृदयस्थल है। यहां प्रतिदिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन फूल बंगला महोत्सव के समय यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

माना जाता है कि इस दौरान जो भी भक्त शुद्ध हृदय से दर्शन करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।


एक नज़र में महोत्सव की तिथियाँ:

आरंभ: 8 अप्रैल 2025 (कामदा एकादशी)

समापन: 24 जुलाई 2025 (हरियाली अमावस्या)

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