बच्चों की सेहत सुधारने में लखनऊ सहित 20 जिलों की स्थिति बेहद खराब है। ये जिले बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। यह खुलासा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की रिपोर्ट में हुआ है। अब इन जिलों में नए सिरे से निगरानी बढ़ाई जा रही है। कोशिश है कि अगले तीन से छह माह में मानकों को सुधार कर संबंधित जिलों को ‘असेवित’ श्रेणी से बाहर निकाला जाए।
एनएचएम की ओर से प्रदेश में बाल स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन, मातृ कल्याण, राष्ट्रीय कार्यक्रम सहित विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। मिशन के कामकाज को लेकर किए गए सर्वे में हालात चौंकाने वाले पाए गए हैं। अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर बाल स्वास्थ्य की रिपोर्ट तैयार की गई।
यह रिपोर्ट नवजात मृत्यु दर, पांच साल की उम्र तक मृत्यु दर, बच्चों के वजन, नवजात की देखभाल, न्यू बॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट की स्थिति आदि मानकों पर आधारित है। रिपोर्ट में बाल स्वास्थ्य के मामले में 20 जिले अति पिछड़े पाए गए हैं। इनमें लखनऊ, प्रतापगढ़, गाज़ियाबाद, अलीगढ़, आज़मगढ़, श्रावस्ती, शाहजहांपुर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, सहारनपुर, बरेली, मथुरा, शामली, गौतमबुद्धनगर, कन्नौज, बुलंदशहर, उन्नाव, गोरखपुर और कानपुर नगर शामिल हैं। अब इन जिलों में विशेष तौर पर निगरानी की जाएगी ताकि अगले छह माह में यहां के मानकों को सुधारा जा सके।
रायबरेली, सुल्तानपुर समेत 15 जिले सबसे अच्छे
जिलेवार प्रगति रिपोर्ट के आधार पर पूरे प्रदेश को चार श्रेणियों में बांटा गया है। जहां 20 जिलों की स्थिति सबसे खराब पाई गई है, वहीं 20 जिलों में सुधार हुआ है और 20 जिले सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 15 जिलों की स्थिति सबसे बेहतर है। इनमें रायबरेली, सुल्तानपुर, हाथरस, मऊ, बांदा, कुशीनगर, महोबा, इटावा, हमीरपुर, मिर्जापुर, झांसी, जौनपुर, ललितपुर, बागपत और हरदोई शामिल हैं।
बाल स्वास्थ्य एनएचएम के डॉ. सूर्यांश ओझा का कहना है कि जिन जिलों में मानकों में कुछ कमियां हैं, उन्हें सुधारा जा रहा है। हर दिन की रिपोर्ट का आकलन किया जा रहा है। स्थलीय निरीक्षण और जिले की टीम को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। लखनऊ में पूरे प्रदेश के अति गंभीर बच्चे रेफर होकर आते हैं। गौतमबुद्धनगर, कानपुर और बरेली जैसे जिलों में भी आसपास के मरीज आते हैं। इस वजह से वहां के आंकड़े खराब दिख रहे हैं, जिन्हें सुधारने की रणनीति बनाई जा रही है।
ग्राफ में गिरावट चिंताजनक
एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के उपाध्यक्ष डॉ. आशुतोष वर्मा का कहना है कि एनएचएम की ओर से बच्चों की सेहत सुधारने के लिए करोड़ों रुपये मिल रहे हैं। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की हकीकत बयां कर रही है। लखनऊ में सामान्य अस्पताल नहीं, बल्कि चिकित्सा स्वास्थ्य और भरपूर बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद हैं। फिर भी बाल स्वास्थ्य के ग्राफ में गिरावट है तो यह चिंताजनक है। यह रिपोर्ट साबित कर रही है कि सरकारी अस्पतालों और संस्थानों में बच्चों की सेहत सुधार के लिए उठाए जा रहे कदम सिर्फ कागज़ों पर हैं।
