CNN की हालिया रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा किया गया है, जिसके मुताबिक अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए हवाई हमले अपने मुख्य उद्देश्य में विफल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान की परमाणु गतिविधियों को रोकने के लिए जो बमबारी की थी, वह Fordow, Natanz और Isfahan जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों की भूमिगत संरचनाओं को पूरी तरह नष्ट नहीं कर सकी। इन ठिकानों को अत्यंत उन्नत सुरक्षात्मक तकनीकों से इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वे सतह पर हमले के बावजूद गहराई में स्थित मुख्य यूरेनियम भंडारण स्थलों और अत्याधुनिक सेंट्रीफ्यूज संयंत्रों को पूरी तरह संरक्षित रख सकें। CNN की रिपोर्ट में उपग्रह से प्राप्त ताज़ा चित्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सतह पर जरूर कुछ क्षति हुई है—जैसे कि इमारतों की छतें टूटना, वाहनों और उपकरणों का नष्ट होना—लेकिन यह क्षति “सांकेतिक” है, न कि रणनीतिक। गहराई में स्थित संरचनाएं अब भी सक्रिय हैं और वहां यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया लगभग अप्रभावित बनी हुई है। इस विफलता के बाद विशेषज्ञों और सामरिक विश्लेषकों ने अमेरिका की तथाकथित “ओब्लिटरेशन” यानी पूर्ण विनाश की नीति पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, विशेषकर ट्रंप प्रशासन के उस दावे पर कि उसने ईरान की परमाणु क्षमता को निर्णायक रूप से खत्म कर दिया है।
यह खुलासा न केवल रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि भू-राजनीतिक प्रभावों के लिहाज़ से भी बेहद संवेदनशील बन जाता है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान अब भी अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने में सक्षम है और उसने अपने महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर ली है। ऐसे में यह आशंका प्रबल हो रही है कि आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक गहराने की संभावना है, विशेषकर तब जब यह भी रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों की मरम्मत और संवर्धन का कार्य शुरू कर दिया है और अतिरिक्त सुरक्षात्मक उपाय भी किए जा रहे हैं। वहीं ट्रंप प्रशासन ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए CNN पर “फेक न्यूज” फैलाने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने एक बयान में कहा है कि “हमारे हमले पूरी तरह सटीक और सफल रहे हैं, और CNN देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।” हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और पेंटागन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट खंडन या समर्थन नहीं आया है, जिससे स्थिति और अधिक उलझी हुई प्रतीत हो रही है।
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इस रिपोर्ट के आने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई है, खासकर उन देशों में जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले से ही सतर्क हैं। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा इस मामले की जांच की मांग की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि ईरान की परमाणु क्षमताएं अब किस स्तर पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान वाकई फिर से यूरेनियम संवर्धन की गतिविधियां तेज करता है, तो यह केवल इस क्षेत्र में हथियारों की दौड़ को और भड़का सकता है और इज़रायल तथा सऊदी अरब जैसे देशों की सुरक्षा चिंताओं को और अधिक गहरा कर सकता है। इस बीच, रूस और चीन ने अमेरिका के हवाई हमलों की आलोचना करते हुए इन्हें “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” करार दिया है और कहा है कि ऐसी कार्रवाइयाँ वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा पैदा करती हैं। कुल मिलाकर, CNN की रिपोर्ट ने केवल एक सैन्य असफलता को उजागर नहीं किया, बल्कि एक ऐसी कूटनीतिक और सामरिक बहस को जन्म दिया है जो आने वाले दिनों में दुनिया भर की राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति को गहराई से प्रभावित कर सकती है।
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