back to top
Thursday, May 7, 2026
24 C
Lucknow
Homeबड़ी खबरभारत-चीन व्यापार पर नेपाल की आपत्ति से उपजे नए भू-राजनीतिक तनाव !

भारत-चीन व्यापार पर नेपाल की आपत्ति से उपजे नए भू-राजनीतिक तनाव !

भारत और चीन ने हाल ही में यह घोषणा की है कि वे लिपुलेख दर्रे के रास्ते से द्विपक्षीय व्यापार को और गति देंगे। दोनों देशों का मानना है कि इस मार्ग से न केवल व्यापार आसान होगा बल्कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। भारत का तर्क है कि लिपुलेख दर्रा रणनीतिक और व्यावसायिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और यह मार्ग पहले भी सीमित दायरे में व्यापार और तीर्थयात्रा के लिए उपयोग किया जाता रहा है। वहीं चीन के लिए यह इलाका तिब्बत को जोड़ने वाला एक अहम मार्ग है। इस समझौते से दोनों देशों को आपसी व्यापारिक लाभ मिलेगा, लेकिन इसका एक और पहलू सामने आया जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति को हिला दिया।

नेपाल ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। नेपाली विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा जैसे इलाके नेपाल के अभिन्न अंग हैं। उनका दावा है कि इन क्षेत्रों को नेपाल ने अपने आधिकारिक नक्शे और संविधान में शामिल किया है, इसलिए भारत और चीन द्वारा आपसी समझौते से इसका उपयोग करना नेपाल की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। नेपाल ने इस मुद्दे को न केवल द्विपक्षीय वार्ताओं में उठाया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे उजागर करने की कोशिश शुरू कर दी है। काठमांडू में राजनीतिक दलों, मीडिया और नागरिक समाज में भी इसको लेकर गहरा आक्रोश दिखाई दे रहा है।

भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख विवाद कोई नया नहीं है। 2019 में जब भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटते हुए नया नक्शा जारी किया था, तब नेपाल ने पहली बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। बाद में 2020 में भारत ने लिपुलेख तक जाने वाली सड़क का उद्घाटन किया, तो नेपाल ने अपने संसदीय प्रस्ताव के जरिए नया राजनीतिक नक्शा जारी कर दिया जिसमें कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताया गया। इस कदम ने दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे मित्रतापूर्ण संबंधों में खटास पैदा कर दी। हालांकि दोनों देशों ने संवाद बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन यह विवाद अब भी अनसुलझा है।

चीन का रवैया भी इस विवाद को और जटिल बना देता है। चीन, जो नेपाल के साथ अपने संबंधों को पिछले एक दशक में काफी मजबूत कर चुका है, भारत के साथ व्यापारिक समझौते को लेकर सतर्क प्रतिक्रिया देता रहा है। नेपाल का मानना है कि चीन को उसकी संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और किसी भी ऐसे समझौते से बचना चाहिए जिसमें विवादित क्षेत्र शामिल हों। लेकिन भू-राजनीतिक दृष्टि से देखें तो चीन के लिए भारत के साथ व्यापारिक मार्गों का विस्तार उसकी बड़ी रणनीति का हिस्सा है। “वन बेल्ट वन रोड” पहल के तहत चीन चाहता है कि दक्षिण एशिया में उसके व्यापारिक और रणनीतिक मार्गों की पकड़ मजबूत हो। ऐसे में नेपाल की नाराजगी और बढ़ जाती है क्योंकि उसे लगता है कि उसका हित पीछे छूट रहा है।

Also Read: चुनाव आयोग का नया आदेश: अब 45 दिन बाद डिलीट होंगे वीडियो, बढ़ी राजनीतिक हलचल

विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद का असर भारत-नेपाल संबंधों पर गहरा पड़ सकता है। नेपाल में पहले से ही चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और इस तरह की घटनाएं नेपाल को और अधिक चीन की ओर झुका सकती हैं। हालांकि नेपाल की जनता के बीच भारत के साथ सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक संबंध गहरे हैं, लेकिन राजनीतिक स्तर पर बढ़ते मतभेद लंबे समय में विश्वास की कमी को जन्म दे सकते हैं। भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति है क्योंकि उसे एक तरफ चीन के साथ अपने व्यापारिक हित साधने हैं और दूसरी ओर नेपाल जैसे पारंपरिक सहयोगी को नाराज भी नहीं करना है।

कुल मिलाकर, लिपुलेख दर्रे से शुरू हुआ यह नया व्यापार मार्ग सिर्फ एक आर्थिक निर्णय नहीं बल्कि एक गहरे भू-राजनीतिक समीकरण का हिस्सा है। नेपाल की आपत्ति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े विवाद केवल नक्शे की रेखाओं का मामला नहीं बल्कि संप्रभुता, राष्ट्रीय अस्मिता और भू-राजनीतिक रणनीतियों से गहराई से जुड़े हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत और चीन इस समझौते पर अड़े रहते हैं या फिर नेपाल की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कोई नया रास्ता निकालते हैं। यदि संवाद और समझदारी से हल नहीं निकला तो यह विवाद भारत-नेपाल और चीन-नेपाल संबंधों में और अधिक तनाव ला सकता है।

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Livenewsx
Livenewsxhttp://www.livenewsx.in
we are digtal news platform.we are covering social facts politics national international news breaking
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments