आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की भारत-विरोधी साजिश को उस समय बड़ा झटका लगा जब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने गुप्त ऑपरेशन के जरिए उसके ठिकानों पर सटीक हमला किया। जानकारी के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद ने हाल ही में गुप्त रूप से करीब 3910 करोड़ रुपये जुटाने का अभियान शुरू किया था। इस भारी-भरकम रकम का इस्तेमाल पाकिस्तान और पीओके में 313 नए आतंकी प्रशिक्षण शिविर बनाने के लिए किया जाना था। इस योजना को अंजाम देने में संगठन के सरगना मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल सैफ ने डिजिटल वॉलेट्स और मस्जिदों में चंदा इकट्ठा कर अहम भूमिका निभाई। इतना ही नहीं, अल रहमत ट्रस्ट नाम का संगठन भी इस फंडिंग में सक्रिय रूप से शामिल था।
भारतीय खुफिया एजेंसियां लंबे समय से जैश की इन गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए थीं। कई हफ्तों तक गुप्त निगरानी और डाटा ट्रैकिंग के बाद सुरक्षा एजेंसियों को इस साजिश का पूरा खाका मिल गया। भारत सरकार ने इस खतरे को देखते हुए एक खास सैन्य अभियान की योजना बनाई, जिसे “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। इस ऑपरेशन का उद्देश्य न केवल जैश के प्रशिक्षण शिविरों को तबाह करना था, बल्कि उसके नेटवर्क और नेतृत्व को भी करारा संदेश देना था।
7 मई 2025 को भारतीय वायुसेना और विशेष बलों ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित जैश के ठिकानों पर सटीक और तेज़ हमले किए। इन हमलों में कई गुप्त ठिकाने पूरी तरह तबाह हो गए। यह ऑपरेशन बेहद सीमित समय में और उच्च तकनीक के इस्तेमाल के साथ अंजाम दिया गया, ताकि किसी भी तरह की अनचाही क्षति से बचा जा सके। इसके जरिए भारत ने न केवल जैश की भविष्य की साजिश को खत्म कर दिया, बल्कि उसके संसाधनों और फंडिंग नेटवर्क पर भी गहरी चोट की।
इन हमलों में मसूद अजहर के 10 पारिवारिक सदस्य और उसके चार करीबी सहयोगी भी मारे गए। यह संगठन के लिए एक बड़ा झटका था क्योंकि इतने करीबी लोगों की एक साथ मौत से उसकी रणनीतिक ताकत बुरी तरह कमजोर पड़ गई है। वहीं, बड़ी संख्या में प्रशिक्षित आतंकी और सहयोगी भी मारे गए, जिससे संगठन की क्षमता आने वाले समय में बुरी तरह प्रभावित होगी।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ऑपरेशन भारत की आतंकवाद-रोधी रणनीति में एक अहम मील का पत्थर है। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है, जिसने दुनिया को दिखा दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। इस बार भी ऑपरेशन पूरी तरह “प्रिसीजन अटैक” था, जिसमें किसी आम नागरिक को नुकसान नहीं हुआ और केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया।
भारत सरकार ने इस ऑपरेशन के जरिए साफ कर दिया है कि आतंक के खिलाफ उसकी नीति “ज़ीरो टॉलरेंस” की है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि जैश-ए-मोहम्मद की यह बड़ी हार आने वाले समय में पाकिस्तान में चल रहे आतंक के नेटवर्क को हिला सकती है। वहीं, भारत ने यह भी साबित कर दिया कि उसकी खुफिया एजेंसियां और सैन्य शक्ति हर स्तर पर तैयार हैं और दुश्मन की किसी भी साजिश को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती हैं।
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