भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि निकट भविष्य में पाकिस्तान में टीम इंडिया कोई सीरीज़ नहीं खेलेगी। इसी तरह पाकिस्तान क्रिकेट टीम को भी भारत आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह निर्णय दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और सुरक्षा तनावों की पृष्ठभूमि में लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान अपने रुख में बदलाव नहीं लाता और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध बहाल करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एशिया कप, टी20 वर्ल्ड कप, वनडे वर्ल्ड कप या चैम्पियंस ट्रॉफी जैसे मल्टीनेशन इवेंट्स में भारत अपनी भागीदारी जारी रखेगा। लेकिन इसके लिए न्यूट्रल वेन्यू का विकल्प चुना जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी टूर्नामेंट की मेज़बानी पाकिस्तान को सौंपी गई है, तो भारत अपनी टीम वहां नहीं भेजेगा और ICC या ACC को किसी अन्य स्थान को वैकल्पिक स्थल के रूप में चुनना होगा। यह नीति भारत के क्रिकेट बोर्ड (BCCI) और सरकार के बीच स्पष्ट रूप से तय हो चुकी है।
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंधों का इतिहास बेहद जटिल रहा है। 2008 मुंबई आतंकी हमलों के बाद से दोनों देशों के बीच कोई द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज़ नहीं हुई है। केवल मल्टीनेशन टूर्नामेंट्स में ही दोनों टीमें आमने-सामने आती रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि हर बार भारत-पाकिस्तान का मैच चाहे एशिया कप हो या वर्ल्ड कप, उसे देखने के लिए दुनिया भर में करोड़ों दर्शक टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ते हैं। क्रिकेट फैंस इन मुकाबलों का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक माहौल ने द्विपक्षीय सीरीज़ को नामुमकिन बना दिया है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) इस फैसले से निराश दिखाई देता है। उनका कहना है कि खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए और क्रिकेट दोनों देशों के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने का जरिया बन सकता है। लेकिन भारत सरकार का तर्क है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद जारी रहेगा और पाकिस्तान भारत विरोधी संगठनों को समर्थन देगा, तब तक क्रिकेट जैसे खेलों के माध्यम से “नॉर्मलाइजेशन” का संदेश देना जनता के साथ अन्याय होगा। यही वजह है कि हर बार भारत ने सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति निकट भविष्य में बदलने वाली नहीं है। भारत का आर्थिक और क्रिकेटिंग ढांचा इतना मज़बूत है कि उसे पाकिस्तान के साथ खेलने पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है। वहीं पाकिस्तान के लिए भारत के साथ न खेलना राजस्व और दर्शकों की संख्या के लिहाज़ से नुकसानदेह साबित होता है। फिर भी ICC और ACC जैसी संस्थाओं के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण रहती है, क्योंकि उन्हें हर टूर्नामेंट के लिए भारत की शर्तों को ध्यान में रखते हुए शेड्यूल बनाना पड़ता है।
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कुल मिलाकर, भारत सरकार का यह फैसला पाकिस्तान के साथ रिश्तों में वर्तमान ठहराव को और स्पष्ट कर देता है। जहां एक ओर क्रिकेट प्रेमी चाहते हैं कि दोनों टीमें एक-दूसरे से ज्यादा खेलें, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियाँ इस राह की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले वर्षों में हालात में कोई सुधार होता है या नहीं, लेकिन फिलहाल के संकेत यही हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सिर्फ ICC और ACC टूर्नामेंट्स तक ही सीमित रहेगा, वह भी किसी तीसरे देश में।
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