अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक समीकरणों में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने दावा किया कि India रूसी तेल खरीदना बंद करने के लिए तैयार हो गया है, लेकिन भारत ने तुरंत इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई भी फैसला केवल राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। भारत के इस रुख ने यह संकेत दिया कि वह वैश्विक दबाव से ज्यादा अपनी रणनीतिक जरूरतों को प्राथमिकता देता है।
भारत का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव आया है और Russia भारत के लिए सस्ते तेल का एक अहम स्रोत बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी, जिससे उसकी ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में मदद मिली। ऐसे में अचानक तेल खरीद बंद करने की संभावना को भारत ने व्यावहारिक नहीं माना।
इसी बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है कि भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते की तैयारी चल रही है। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने जानकारी दी कि भारत के साथ प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) पर बातचीत का पहला दौर सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। यह बयान दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने का संकेत माना जा रहा है।
ओवरचुक के अनुसार यदि यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है तो रूसी कंपनियों को लगभग 2.2 अरब लोगों के विशाल बाजार तक पहुंच मिल सकती है। इसमें केवल भारत ही नहीं बल्कि उससे जुड़े क्षेत्रीय बाजार भी शामिल माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील रूस के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच एक बड़ी आर्थिक राहत साबित हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम को भारत की बहु-आयामी विदेश नीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। एक तरफ भारत United States के साथ ट्रेड और रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ रूस के साथ पारंपरिक रिश्तों को भी कायम रखे हुए है। यह संतुलन भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” नीति को दर्शाता है, जिसमें वह किसी एक शक्ति ब्लॉक पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
हाल ही में European Union के साथ संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ी है, जिससे संकेत मिलता है कि भारत एक साथ कई वैश्विक आर्थिक साझेदारियां मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में रूस के साथ PTA वार्ता इस बड़े आर्थिक विजन का हिस्सा मानी जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और व्यापार ये तीनों क्षेत्र भारत-रूस संबंधों की नींव रहे हैं। यदि नया व्यापार समझौता होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक मात्रा में तेजी से वृद्धि हो सकती है। खासकर फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का बयान केवल भू-राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकता है, क्योंकि अमेरिका चाहता है कि भारत पश्चिमी नीतियों के अधिक करीब आए। लेकिन भारत का जवाब यह दिखाता है कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है और किसी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं लेना चाहता।
अब वैश्विक नजरें भारत और रूस के बीच संभावित मेगा डील पर टिक गई हैं, क्योंकि अगर यह समझौता होता है तो न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार संतुलन पर भी इसका असर पड़ सकता है। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि यह साझेदारी केवल कूटनीतिक चर्चा तक सीमित रहती है या वास्तव में एक ऐतिहासिक आर्थिक समझौते का रूप लेती है।
written by :- Anjali Mishra
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