पीडब्ल्यूडी और विवादों का पुराना नाता रहा है। आये दिन विभाग में कोई न कोई विवाद जन्म जरूर लेता है, लेकिन जांच के नाम पर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है और निष्कर्ष बहुत कम ही निकल पाता है। ऐसा ही एक नया मामला बस्ती जिले का है, जिसकी शिकायत बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी से की है।
इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव अजय सिंह चौहान ने एक जांच समिति गठित की है, लेकिन एक बार फिर इस जांच की कमान आर.एन. सिंह को सौंप दी गई है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर हर जांच आर.एन. सिंह को ही क्यों सौंपी जाती है और उन जांचों का कोई ठोस परिणाम क्यों नहीं निकलता?
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बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने बस्ती के विकासखंड बनकटी में मुंडेरवा-रामपुर मार्ग के टेंडर को लेकर शिकायत की है। आरोप है कि अधिशासी अभियंता अवधेश यादव, जो निर्माण खंड-1 में लंबे समय से तैनात हैं, ने मेसर्स गोविंद माधव की शिकायत पर कई फर्मों को गलत तथ्यों के आधार पर अपात्र घोषित कर दिया और अपनी चहेती फर्म को विभागीय दर पर काम भी आवंटित कर दिया।
बताया जाता है कि अवधेश यादव सपा सरकार के दौरान मुख्य विपक्षी दल के नेताओं के बेहद करीबी रहे हैं। इसके बावजूद वह लगातार विभाग में उच्च अधिकारियों की कृपा से जमे हुए हैं और बार-बार शिकायतों के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वास्तव में, पीडब्ल्यूडी विभाग में टेंडर और टेंडर आवंटन को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। हर बार जांच की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता आर.एन. सिंह को ही सौंपी जाती है, लेकिन परिणाम शून्य रहता है। सूत्रों के मुताबिक, आर.एन. सिंह पर पहले से ही वसूली के आरोप लगते रहे हैं। बस्ती टेंडर मामले में जिस फर्म—मेसर्स गोविंद माधव—का रजिस्ट्रेशन खुद आर.एन. सिंह ने कराया था, उसमें भी मानकों की अनदेखी की गई थी, और विभाग में इसका विरोध भी हुआ था।
ऐसे में सवाल उठता है कि जिस अधिकारी पर फर्म के गलत पंजीकरण का आरोप है, उसी को फिर उसी फर्म से जुड़े टेंडर की जांच क्यों सौंपी गई? यह तो वही कहावत चरितार्थ करती है—“बिल्ली को दूध की रखवाली देना”।
अब देखना यह होगा कि बीजेपी सांसद की शिकायत के बाद इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर एक बार फिर जांच की खानापूरी कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, विभाग के भीतर भी यह चर्चा गर्म है कि आर.एन. सिंह और अवधेश यादव को बार-बार संरक्षण क्यों दिया जा रहा है।
