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अब मनमानी नहीं चलेगी! लखनऊ में किसानों के लिए बदला उर्वरक नियम, नई व्यवस्था से कालाबाजारी पर बड़ा वार

उत्तर प्रदेश में किसानों को सब्सिडी वाले उर्वरक की उपलब्धता को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी लखनऊ से शुरू हुई नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को जरूरत और पात्रता के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद कृषि विभाग ने वितरण व्यवस्था को और ज्यादा पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस बदलाव को किसानों तक सही लाभ पहुंचाने और गड़बड़ियों पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाला उर्वरक सही किसानों तक पहुंचे और किसी प्रकार की अनियमितता या दुरुपयोग की संभावना कम हो। लंबे समय से उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, जिनमें जरूरतमंद किसानों तक पर्याप्त मात्रा में उर्वरक न पहुंचने और कालाबाजारी जैसी समस्याएं शामिल रही हैं। अब सरकार इन चुनौतियों पर सख्ती दिखाती नजर आ रही है।

प्रदेश में उर्वरक उपलब्धता को लेकर भी सरकार ने राहत भरी तस्वीर पेश की है। जानकारी के अनुसार राज्य में करीब 27.94 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बताया जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि आगामी कृषि सीजन के दौरान किसानों को उर्वरक की कमी का सामना कम करना पड़ सकता है।

नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए फार्मर आईडी और जमीन के रिकॉर्ड की जरूरत होगी। यानी केवल वही किसान सब्सिडी वाले उर्वरक का लाभ ले सकेंगे जिनकी जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध होगी। इसका उद्देश्य वितरण प्रक्रिया को डेटा आधारित और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है।

सरकार ने प्रति हेक्टेयर DAP और यूरिया की सीमा भी निर्धारित कर दी है। इसका मतलब है कि खेती की जमीन के हिसाब से ही उर्वरक की मात्रा तय की जाएगी। इससे जरूरत से ज्यादा खरीद और भंडारण की संभावना को कम करने की कोशिश की जा रही है। यह व्यवस्था संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लागू होने से उर्वरक का बेहतर प्रबंधन हो सकता है। कई बार जरूरत से ज्यादा खरीद या गलत वितरण के कारण वास्तविक किसानों को परेशानी होती है। ऐसे में रिकॉर्ड आधारित प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकार ने कालाबाजारी और अवैध भंडारण के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि कहीं भी उर्वरक की अवैध जमाखोरी या नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई की जाए। इससे यह संकेत मिल रहा है कि सरकार केवल नियम बना ही नहीं रही, बल्कि उनके पालन को लेकर भी गंभीर है।

फिलहाल नई व्यवस्था को किसानों के हित और वितरण प्रणाली में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह प्रणाली जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इससे किसानों को वास्तव में आसानी और पारदर्शिता का लाभ मिल पाता है।

written by:- Anjali Mishra

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