मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब घटनाक्रम तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलमार्ग को लेकर बड़ा दावा किया है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों ने नई चर्चा शुरू कर दी है। इन दोनों घटनाओं ने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को फिर से केंद्र में ला दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने कथित तौर पर Persian Gulf Strait Authority (PGSA) से जुड़ी एक नई घोषणा का हवाला देते हुए दावा किया है कि होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को उसकी मंजूरी की आवश्यकता होगी। इस दावे को लेकर सोशल मीडिया पर भी विभिन्न अपडेट सामने आने की बात कही जा रही है।
होर्मुज जलमार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की नई शर्त या नियंत्रण संबंधी दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चिंता पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के दावे व्यवहारिक रूप लेते हैं तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों और समुद्री व्यापार पर भी दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि दुनिया की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।
हालांकि इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच राहत देने वाली खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब संभावित समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि प्रस्तावित डील के तहत ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने पर सहमत हो सकता है।
यदि इस तरह का समझौता आगे बढ़ता है तो यह परमाणु विवाद के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक माना जाएगा। संवर्धित यूरेनियम लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता का केंद्र रहा है और इसे लेकर कई दौर की बातचीत भी होती रही है।
इसी संदर्भ में Donald Trump ने भी दावा किया है कि जंग टालने और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने को लेकर समझौता अब बेहद करीब पहुंच चुका है। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में नई उम्मीदें भी पैदा की हैं।
फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। एक ओर समुद्री नियंत्रण और रणनीतिक दावे हैं, तो दूसरी ओर कूटनीति और समझौते की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व तनाव की दिशा क्या होती है टकराव की या समझौते की।
written by:- Anjali Mishra
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